लखनऊ: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) संगठन में बहुत जल्द एक बड़ा और व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है. आगामी सांगठनिक बदलावों को लेकर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक मंथन का दौर पूरा हो चुका है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बार पश्चिम, ब्रज और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पूरी तरह से ‘जातीय कार्ड’ बदलने की तैयारी में है, जबकि अवध, गोरखपुर और काशी क्षेत्र में पुराने जातीय समीकरणों को बरकरार रखते हुए सिर्फ नए चेहरों को कमान सौंपने पर चर्चा चल रही है. प्रदेश संगठन और क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों की आधिकारिक घोषणा 15 जून के आसपास की जा सकती है.
जानिए पार्टी का नया प्लान
काशी क्षेत्र (71 विधानसभा सीटें)
PM नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की वजह से इस क्षेत्र पर राजनीतिक विश्लेषकों की खास नजर है. अभी यहां ओबीसी (OBC) चेहरा दिलीप पटेल क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं. ऐसी चर्चा है कि पार्टी यहाँ ओबीसी समाज से ही किसी दूसरी जाति के नेता को कमान सौंप सकती है.
अवध क्षेत्र (82 विधानसभा सीटें)
सबसे ज्यादा सीटों वाले इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की कमान अभी युवा कमलेश मिश्र के पास है. इस बार यहां विकल्प के रूप में दो अन्य ब्राह्मण चेहरों के नामों की चर्चा है.
गोरखपुर क्षेत्र (62 विधानसभा सीटें)
सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का गृह क्षेत्र होने के कारण यह बेहद अहम है. वर्तमान अध्यक्ष सहजानंद राय हैं. यहां दो अन्य नए भूमिहार चेहरों के बीच मुकाबला चल रहा है.
पश्चिम क्षेत्र (71 विधानसभा सीटें): वर्तमान में यहाँ क्षत्रिय चेहरा सतेंद्र शिशौदिया अध्यक्ष हैं। इस बार पार्टी यहाँ बड़ा बदलाव करते हुए गुर्जर या वैश्य समाज से किसी एक फैक्टर पर दांव खेलने की रणनीति बना रही है।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र (52 विधानसभा सीटें)
वर्तमान कमान प्रकाश पाल के हाथों में है. इस क्षेत्र में इस बार पाल समाज की जगह किसी मजबूत क्षत्रिय चेहरे को बड़ी भूमिका देने की तैयारी चल रही है.
ब्रज क्षेत्र (65 विधानसभा सीटें)
भाजपा के हार्डकोर हिंदुत्व का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में अभी दुर्गविजय शाक्य क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं. पार्टी इनके विकल्प के रूप में दो बड़े लोध चेहरों के बीच समीकरण फिट करने की कोशिश में है.
