NewsClick Case: न्यूजक्लिक केस में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ED ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जानिए 92 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग, नेविल रॉय सिंघम कनेक्शन और ED की दलीलों के बारे में.

NewsClick Case: डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म न्यूजक्लिक और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ से जुड़े कथित विदेशी फंडिंग मामले में एक नया मोड़ आ गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें न्यूजक्लिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर और मनी लॉन्ड्रिंग जांच को रद्द कर दिया गया था. जांच एजेंसी का कहना है कि हाईकोर्ट ने जांच में मिले अहम साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया है.
क्या है विदेशी फंडिंग का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद न्यूजक्लिक को मिली कथित विदेशी फंडिंग से जुड़ा हुआ है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अगस्त 2020 में कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप था कि कंपनी को वर्ष 2018 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रूप में लगभग 9.59 करोड़ रुपये मिले थे. ईडी का दावा है कि इस पैसे का संबंध अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम से था और इसका इस्तेमाल एक खास विचारधारा के प्रचार के लिए किया गया था.
92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम पर सवाल
ईडी ने केवल 9.59 करोड़ रुपये के निवेश पर ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि 92 करोड़ रुपये की एक और रकम पर भी जांच की बात कही है. एजेंसी के अनुसार, न्यूजक्लिक को सिंघम से जुड़ी कंपनियों से यह बड़ी रकम मिली थी. इसे कागजों पर सेवाओं के निर्यात का भुगतान दिखाया गया था. ईडी का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा प्रबीर पुरकायस्थ के दिल्ली स्थित फ्लैट को खरीदने में भी खर्च किया गया था.
हाईकोर्ट ने क्यों दी थी न्यूजक्लिक को राहत?
मई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने एफआईआर और ईडी जांच को रद्द कर दिया था. अदालत ने कहा था कि अगर पुलिस के आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तो भी धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता. हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि पैसे लगाने वाले अमेरिकी निवेशक ने खुद को ठगे जाने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी. इसी आधार पर अदालत ने आपराधिक साजिश के आरोपों को भी खारिज कर दिया था.
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दी दलील?
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में ईडी ने कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं है. एजेंसी का तर्क है कि धोखाधड़ी के मामले की जांच सिर्फ इस आधार पर बंद नहीं की जा सकती कि निवेशक ने शिकायत नहीं की है. सरकारी तंत्र के सामने गलत जानकारी पेश करने जैसे पहलुओं की जांच होना जरूरी है. ईडी के मुताबिक, जांच में मिले ईमेल और अन्य दस्तावेजों की गहराई से जांच होनी चाहिए थी, जिसे हाईकोर्ट ने नजरअंदाज कर दिया.
नेविल रॉय सिंघम और चीन समर्थक प्रचार का एंगल
इस पूरे मामले में अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम का नाम मुख्य रूप से सामने आया है. भारतीय जांच एजेंसियों का आरोप है कि न्यूजक्लिक को मिले विदेशी पैसों का इस्तेमाल चीन के पक्ष में माहौल बनाने और प्रचार करने के लिए किया गया. एजेंसी का कहना है कि शेयर जारी करने की आड़ में विदेशी निवेश के नियमों का उल्लंघन हुआ है. अब देखने वाली बात यह होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में ईडी की याचिका पर क्या फैसला सुनाता है.
