Belgium to Lakhimpur Kheri biopolymer plant machine: बेल्जियम से लखीमपुर खीरी आ रही विशालकाय मशीन वाराणसी के पास कच्चे रास्ते में धंस गई. 260 पहियों वाले ट्रक को निकालने के लिए लोहे की चादरें बिछाई जा रही हैं.

Belgium to Lakhimpur Kheri biopolymer plant machine: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में देश का पहला और सबसे बड़ा बायो पॉलीमर प्लांट तैयार किया जा रहा है. कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल में बन रहे इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 3000 करोड़ रुपये है. इस प्लांट में चीनी के इस्तेमाल से पर्यावरण के अनुकूल बायोप्लास्टिक (PLA) बनाया जाएगा. इस बेहद खास प्रोजेक्ट के लिए यूरोप के बेल्जियम देश से एक बेहद विशालकाय मशीन मंगाई गई है, जिसे ‘सायक्लाजेसन रिएक्टर’ कहा जाता है. यह मशीन लगभग 6 महीने का लंबा समुद्री और जमीनी सफर तय करके यूपी के वाराणसी पहुंची है. ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से लखीमपुर तक इस एक मशीन को लाने में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम ट्रांसपोर्ट खर्च आया है.
बनारस में मिट्टी में धंसा बाहुबली ट्रेलर
बेल्जियम से आई यह विशालकाय मशीन जब वाराणसी के डाफी टोल प्लाजा के पास पहुंची, तो वहां बने एक कच्चे रास्ते में इसका भारी ट्रेलर अचानक धंस गया. इसके विशाल आकार और वजन के कारण इसे रास्ते से आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल हो गया. अब इस भारी-भरकम ट्रेलर को निकालने के लिए जमीन पर लोहे की मोटी चादरें बिछाई जा रही हैं. दो बड़े ट्रेलर, क्रेन, हाइड्रा मशीनें और इंजीनियरों की खास टीम दिन-रात काम में जुटी हुई है. ट्रक को थोड़ा पीछे खींचकर और लोहे की प्लेट्स का सहारा देकर धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
260 पहियों वाले ट्रक को देखने पहुंचे लोग
इस विशालकाय मशीन को ले जा रहे विशाल मल्टी-एक्सल ट्रक को देखने के लिए बनारस के लंका और डाफी टोल प्लाजा पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है. लोग दूर-दूर से इस ‘बाहुबली’ ट्रक की झलक देखने पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोग ट्रक और मशीन के साथ सेल्फी ले रहे हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर शेयर कर रहे हैं. सुरक्षा और यातायात को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई और लॉजिस्टिक्स कंपनी की पूरी टीम मौके पर मौजूद है. इस भारी लोड को संभालने के लिए भारत की जानी-मानी लॉजिस्टिक्स कंपनी जेएम बक्शी की पूरी टीम 62 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ लगातार रास्ते में साथ चल रही है.
3 पावरफुल इंजन और बदला गया पहियों का ढांचा
ओडिशा के पारादीप पोर्ट से जब यह विशालकाय ट्रक रवाना हुआ था, तब इसमें कुल 308 पहिए लगाए गए थे. हालांकि, उत्तर प्रदेश की सड़कों और रास्तों की बनावट को देखते हुए बाद में पहियों की संख्या घटाकर 260 कर दी गई. इस महाकाय वाहन को खींचने के लिए 3 बेहद शक्तिशाली इंजन साथ चल रहे हैं. समतल और सीधे रास्तों पर एक इंजन ही ट्रक को खींचता है, जबकि चढ़ाई या मुश्किल मोड़ों पर तीनों इंजनों की ताकत का इस्तेमाल किया जाता है. पिछले कई महीनों से इस ट्रक में ही लॉजिस्टिक्स टीम के कर्मचारियों का रहने और खाने का ठिकाना बना हुआ है.
रास्ते में आने वाले 6 फुटब्रिज हटाने की बड़ी चुनौती
वाराणसी से लखीमपुर खीरी तक का सफर इस विशालकाय मशीन के लिए आसान नहीं रहने वाला है. रास्ते में ऊंचाई की रुकावट से बचने के लिए बनारस में ही लगभग 6 ओवरहेड फुटब्रिज को अस्थायी रूप से हटाने की योजना बनाई गई है. वाराणसी से निकलने के बाद यह ट्रक गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती और बलरामपुर होते हुए लखीमपुर के कुंभी पहुंचेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो से तीन हफ्तों में यह ट्रक अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा. इस पूरी यात्रा और परिवहन की पल-पल की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ले रहे हैं.
विदेशी इंजीनियर 1 महीने में करेंगे मशीन का इंस्टॉलेशन
लखीमपुर खीरी पहुंचने के बाद इस विशालकाय मशीन को स्थापित करने का काम तेजी से शुरू किया जाएगा. बेल्जियम और अन्य देशों से आ रहे विदेशी तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में लगभग एक महीने के भीतर इसके इंस्टॉलेशन का लक्ष्य रखा गया है. इस मशीन के चालू होने के बाद भारत में बड़े पैमाने पर बायोडिग्रेडेबल बायोप्लास्टिक का निर्माण शुरू हो जाएगा. इससे न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि गन्ने की खेती करने वाले स्थानीय किसानों और युवाओं के लिए रोजगार और तरक्की के नए रास्ते भी खुलेंगे.
