delhi ncr sudden fog dust storm: दिल्ली-एनसीआर में अचानक छाई धुंध के पीछे ईरान हमले की अफवाहों को खारिज करते हुए मौसम विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान और थार रेगिस्तान से आ रही धूल भरी हवाओं को असली वजह बताया है. अगले 48 घंटों में हवा की दिशा बदलने के साथ स्थिति में सुधार की उम्मीद है.

delhi ncr sudden fog dust storm: इन दिनों दिल्ली और National Capital Region के लोगों को अचानक घनी धुंध का सामना करना पड़ रहा है. आम तौर पर ऐसी स्थिति सर्दियों में देखने को मिलती है. लेकिन इस बार बसंत के मौसम में ही आसमान धुंधला दिखाई देने लगा है. दिन के समय भी हल्का धुआं और धुंध छाई रही. इसके कारण हवा की गुणवत्ता यानी Air Quality Index भी खराब हो गई. कई जगहों पर लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत भी होने लगी.
इस धुंध को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें फैलने लगीं. कुछ लोगों ने दावा किया कि यह धुआं विदेशों में हुई घटनाओं से जुड़ा हो सकता है. कुछ पोस्ट में कहा गया कि ईरान में रिफाइनरी पर हुए हमले और वहां हुई कथित ‘पेट्रोल रेन’ की वजह से यह धुंध भारत तक पहुंची है. इन दावों ने लोगों के बीच और ज्यादा भ्रम पैदा कर दिया. लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस धुंध की असली वजह स्थानीय मौसम की स्थिति है. मौसम विभाग से जुड़े विशेषज्ञ Mahesh Palawat ने बताया कि तेज पश्चिमी हवाएं इस समय उत्तर भारत की ओर चल रही हैं. ये हवाएं पाकिस्तान के Balochistan और भारत के Thar Desert जैसे सूखे इलाकों से धूल के कण लेकर आ रही हैं. जब इन इलाकों में तेज हवा चलती है तो रेत और धूल हवा में उड़ जाती है. यही धूल सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंच जाती है और कई शहरों को प्रभावित करती है.
इन धूल कणों की वजह से आसमान धुंधला दिखाई देता है. हवा में भूरे या ग्रे रंग की परत बन जाती है. इससे विजिबिलिटी यानी दूर तक देखने की क्षमता भी कम हो जाती है. हालांकि देखने में यह स्मॉग जैसा लगता है. लेकिन असल में यह औद्योगिक प्रदूषण से नहीं बना होता. यह ज्यादातर प्राकृतिक धूल के कणों से बनता है. इसलिए इसे सामान्य प्रदूषण से थोड़ा अलग माना जाता है.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी. जैसे ही हवा की दिशा और गति बदलेगी, धूल धीरे-धीरे नीचे बैठने लगेगी. इससे आसमान साफ होने लगेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक अगले एक से दो दिनों में हालात बेहतर हो सकते हैं. तब तक लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को बाहर कम निकलने की सलाह दी गई है.
