दिल्ली में DTC बस चालकों ने 28 सितंबर को अपनी मांगों को लेकर काम बंद आंदोलन का आह्वान किया था. हालांकि यूनियन ने इस आंदोलन को वापस ले लिया. खबर में पढ़ें क्यों शुरू हुआ विवाद…
देश की राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक बस व्यवस्था को लेकर चल रहा विरोध अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. आपको बता दे कि 15 सितंबर से निजी ऑपरेटरों के बस चालक वेतन और सेवा शर्तों से जुड़ी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं. इसके चलते दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के अधीन चलने वाली निजी ऑपरेटरों की बस सेवाएं प्रभावित हुईं और लाखों यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ा.
आपको बता दे कि इसी बीच DTC कर्मचारी एकता यूनियन ने भी 28 सितंबर को काम बंद आंदोलन का आह्वान किया था. हालांकि अब यूनियन ने यह आंदोलन वापस ले लिया है. यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी का कहना है कि दिल्ली में आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लागू किए जाने के बाद कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई का खतरा है, इसलिए 28 सितंबर यानी सोमवार का काम बंद आंदोलन निरस्त कर दिया गया. उन्होंने बताया कि छह महीने बाद आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून हटने के बाद कर्मचारियों की मांगों को लेकर नए सिरे से आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
जानकारी के मुताबिक़ दिल्ली की बस व्यवस्था में मौजूदा संकट की शुरुआत 15 सितंबर से हुई थी. जब डीटीसी के अधीन निजी ऑपरेटरों के बस चालक वेतन बढ़ाने समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए. चालकों की प्रमुख मांग वेतन में बढ़ोतरी के साथ-साथ बीमा, ओवरटाइम व अन्य सेवा सुविधाओं से जुड़ी रही. हड़ताल का सीधा असर बसों के संचालन पर पड़ा. डिपो से बसें नहीं निकलने के कारण लाखों यात्रियों को परेशानी हुई. दिल्ली में बसों पर बड़ी संख्या में निर्भर रहने वाले छात्र, नौकरीपेशा लोग, दिहाड़ी मजदूर, बुजुर्ग, दिव्यांग व मरीज प्रभावित हुए.
अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती
बताया जा रहा है कि निजी ऑपरेटरों के चालकों की हड़ताल के बाद डीटीसी ने सरकारी व उपलब्ध संविदा कर्मचारियों के जरिए बस संचालन बहाल करने का प्रयास किया. कई डिपो में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई. 19 सितंबर को डीटीसी ने संचालन सुधारने के लिए चालकों को जरूरत के मुताबिक अलग-अलग डिपो में अस्थायी रूप से तैनात किया था. हालांकि हड़ताल के शुरुआती दिनों में स्थिति काफी गंभीर रही है. 18 सितंबर को यूनियन की ओर से 80 प्रतिशत से अधिक बसों के सड़क से बाहर होने का दावा किया गया था. बाद में संचालन में सुधार हुआ.
काम बंद करने की थी तैयारी
आपको बता दे कि निजी बस चालकों के आंदोलन के बीच DTC कर्मचारी एकता यूनियन ने 28 सितंबर को काम बंद आंदोलन का आह्वान किया था. यूनियन की ओर से संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों व पारिश्रमिक से जुड़े मुद्दे उठाए गए. बताया जा रहा है कि यूनियन की मांगों में संविदा कर्मचारियों के लिए मूल डीए व्यवस्था लागू करना व डीटीसी बसें चला रहे निजी चालकों को डीटीसी के पेरोल पर लेने की मांग शामिल थी. इस घोषणा के बाद डीटीसी ने भी सख्ती बढ़ा दी थी. डीटीसी ने चालकों और परिचालकों की छुट्टियां और साप्ताहिक अवकाश रद्द करने का फैसला किया. 24 से 30 सितंबर के बीच छुट्टी नहीं देने के आदेश जारी किए गए.
