SCO Meeting in Islamabad: आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते’ के स्पष्ट रुख के बावजूद भारत ने अपने सीनियर कूटनीतिज्ञ आलोक अमिताभ डिमरी को इस्लामाबाद भेजा है. जानिए SCO बैठक में भारत की मौजूदगी का पूरा रणनीतिक गणित.

SCO Meeting in Islamabad: भारत की पाकिस्तान नीति हमेशा से बिल्कुल साफ और सख्त रही है. भारत का स्पष्ट मानना है कि “आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते.” इसके बावजूद भारत ने अपने वरिष्ठ और अनुभवी कूटनीतिज्ञ आलोक अमिताभ डिमरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद भेजा है. इस कदम के सामने आते ही यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत ने अपना रुख नरम कर लिया है? असल में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और हालिया सैन्य तनाव के बाद यह पहला मौका है जब इतने उच्च स्तर का भारतीय अधिकारी पाकिस्तान की धरती पर उतरा है. हालांकि विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कोई द्विपक्षीय (Bilateral) मुलाकात नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की तय प्रक्रिया का हिस्सा है.
इस्लामाबाद पहुंचे भारत के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ
विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के लिए भारत के राष्ट्रीय समन्वयक आलोक अमिताभ डिमरी इस समय इस्लामाबाद में मौजूद हैं. वे 28 से 30 सितंबर तक चलने वाली SCO की ‘काउंसिल ऑफ नेशनल कोऑर्डिनेटर्स’ की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं. पाकिस्तान ने 1 सितंबर को किर्गिस्तान से SCO की अध्यक्षता संभाली थी. अगस्त 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले SCO राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन की तैयारियों के सिलसिले में यह पाकिस्तान की ओर से आयोजित पहली बड़ी कूटनीतिक गतिविधि है.
भारत की ‘टू-ट्रैक’ कूटनीतिक रणनीति
भारत इस पूरे मामले में अपनी पुरानी और आजमाई हुई ‘टू-ट्रैक’ नीति का पालन कर रहा है. इस नीति का सीधा सा नियम है कि पाकिस्तान के साथ अलग से कोई मेज पर बैठकर द्विपक्षीय बातचीत तब तक नहीं होगी, जब तक वह सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं कर देता. लेकिन जब बात किसी बहुपक्षीय (Multilateral) मंच की आती है, तो भारत अपने हितों की रक्षा के लिए उसमें हिस्सा जरूर लेता है. साल 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बनने के बाद से भारत ने उरी, पुलवामा और हालिया घटनाओं के बावजूद इस मंच के कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
पाकिस्तान को एकतरफा चालों से रोकना
भारतीय प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद भेजने का एक बड़ा मकसद पाकिस्तान पर नकेल कसना भी है. आलोक डिमरी अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के मंजे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं. उनकी मौजूदगी से भारत संगठन के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया में पूरी तरह शामिल रहेगा. इससे पाकिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल भारत विरोधी एजेंडा चलाने या मनमानी करने के लिए नहीं कर पाएगा. इसके अलावा भारत बिना सीधी द्विपक्षीय बात किए भी आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे अहम मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड पर अपना पक्ष मजबूती से दर्ज करा सकेगा.
बहुपक्षीय प्रतिबद्धता और विदेश मंत्री की मिसाल
भारत का यह कदम केवल बहुपक्षीय प्रतिबद्धता को पूरा करने का व्यावहारिक जरिया है. इससे पहले भी जब माहौल काफी तनावपूर्ण था, तब अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस जयशंकर खुद SCO शासनाध्यक्षों की बैठक में हिस्सा लेने इस्लामाबाद गए थे. भारत हर बार यह बात दुनिया के सामने साफ कर देता है कि बहुपक्षीय सम्मेलनों में शामिल होने का मतलब संबंधों का सामान्य होना बिल्कुल नहीं है. इस बार भी भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ अलग से कोई द्विपक्षीय बैठक शेड्यूल नहीं की गई है.
2027 के शिखर सम्मेलन का अगला रुख
आने वाले समय में पाकिस्तान 2027 के SCO शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को न्योता भेजने वाला है. जब भारत ने इस सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी न्योता दिया गया था और उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से इसमें हिस्सा लिया था. साल 2027 में होने वाले सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किस स्तर का होगा, इसका फैसला उस समय के सुरक्षा माहौल और कूटनीतिक परिस्थितियों को देखकर ही लिया जाएगा.
