India us trade tariff news: संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाया गया 18 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क कानूनी रूप से लागू नहीं माना जा रहा है. फिलहाल भारत पर लगभग 3.5 प्रतिशत पुराने सामान्य शुल्क के साथ नया 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क जुड़कर कुल असर करीब 13.5 प्रतिशत बनता है.

India us trade tariff news: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने कार्यकाल में टैरिफ को एक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल किया था. कभी व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया गया. कभी रूस से तेल खरीदने पर सवाल खड़े किए गए. कभी यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर चेतावनी दी गई. इसी नीति के तहत भारत पर भी भारी टैरिफ लगाया गया था. पहले भारत पर 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया. इसके कुछ समय बाद इसे बढ़ाकर सीधे 50 प्रतिशत कर दिया गया. उस समय कहा गया था कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना इसका मुख्य कारण है. बाद में भारत और United States के बीच ट्रेड डील पर बातचीत आगे बढ़ी. तभी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया.
अब स्थिति बदल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के लगाए गए व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है. अदालत ने साफ कहा कि शांति काल में पुराने आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करके इस तरह टैरिफ नहीं लगाया जा सकता. इसी फैसले के बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि भारत को अब अमेरिका को कितना टैरिफ देना होगा. क्या 18 प्रतिशत लागू रहेगा. क्या नया 10 प्रतिशत लागू होगा. या फिर कुल टैरिफ 13.5 प्रतिशत बनेगा. यही असमंजस इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है.
अगर कानूनी स्थिति को सीधे शब्दों में समझें. तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 18 प्रतिशत वाला रेसिप्रोकल टैरिफ टिक नहीं पाता. ऐसे में भारत पर वही पुराना सामान्य शुल्क बचता है. जो पहले औसतन करीब 3.5 प्रतिशत माना जाता रहा है. यह वह स्तर है जो भारत को सामान्य व्यापारिक दर्जे के तहत देना पड़ता था. लेकिन इसी बीच ट्रंप ने एक अलग कानून का सहारा लेते हुए 10 प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने का ऐलान कर दिया. यह कदम अदालत के फैसले के तुरंत बाद उठाया गया. इसी वजह से भारत पर कुल टैरिफ फिर बढ़कर 13.5 प्रतिशत के आसपास पहुंचता दिख रहा है.
यह 10 प्रतिशत वाला नया शुल्क धारा 122 के तहत लगाया गया है. इस कानून के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति 150 दिनों तक अधिकतम 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं. इसके बाद उन्हें United States Congress से मंजूरी लेनी होती है. ट्रंप ने बयान देकर कहा कि भारत के लिए टैरिफ पहले तय हुई ट्रेड डील के मुताबिक 18 प्रतिशत ही रहेगा. लेकिन बाद में White House की ओर से स्थिति साफ की गई. कहा गया कि कानूनी रूप से इस समय भारत पर केवल 10 प्रतिशत का ही टैरिफ लागू किया जा सकता है.
इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल India पर 18 प्रतिशत टैरिफ लागू रहने की कोई ठोस कानूनी व्यवस्था नहीं बचती. पहले का अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माने वाला हिस्सा पहले ही हटाया जा चुका है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरा रेसिप्रोकल ढांचा ही कमजोर हो गया है. इसलिए व्यवहारिक रूप से देखा जाए. तो भारत पर पुराना लगभग 3.5 प्रतिशत शुल्क बना रहता है. उसके ऊपर नया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ जुड़ता है. इसी गणना से भारत पर प्रभावी अमेरिकी टैरिफ अभी करीब 13.5 प्रतिशत माना जा रहा है. आगे का फैसला अब राजनीतिक और संसदीय मंजूरी पर निर्भर करेगा.
