mandir darshan controversy: विश्व कप जीत के बाद पटना पहुंचे ईशान किशन ने हनुमान मंदिर में ट्रॉफी दर्शन से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. उन्होंने समझदारी दिखाते हुए कहा कि इस समय केवल देश की जीत और खुशी पर बात होनी चाहिए, न कि अनावश्यक विवादों पर.

mandir darshan controversy: भारत की बड़ी जीत के बाद विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन का एक जवाब इन दिनों काफी चर्चा में है. विश्व कप जीतने के बाद जब वह पटना पहुंचे तो वहां उनका जोरदार स्वागत किया गया. इस दौरान पत्रकारों ने उनसे कई सवाल पूछे. इसी बीच एक सवाल ऐसा भी आया जिसने पहले से चल रहे विवाद की ओर इशारा किया. लेकिन ईशान किशन ने बेहद शांत और समझदारी भरे अंदाज में जवाब देकर बात को वहीं खत्म कर दिया. अब उनका यह जवाब लोगों के बीच तेजी से फैल रहा है.
दरअसल एक पत्रकार ने उनसे पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आजाद के बयान के बारे में सवाल किया था. यह विवाद तब शुरू हुआ था जब भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, मुख्य कोच गौतम गंभीर और क्रिकेट प्रशासक जय शाह विश्व कप जीतने के बाद अहमदाबाद में स्थित एक हनुमान मंदिर में ट्रॉफी लेकर दर्शन करने पहुंचे थे. खिलाड़ियों का मंदिर पहुंचने का दृश्य लोगों के बीच तेजी से फैल गया था. इसके बाद इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं.
जब पटना में ईशान किशन से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने विवाद में पड़ने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह अभी इतनी बड़ी जीत हासिल करके लौटे हैं, इसलिए उनसे खुशी और जीत से जुड़े सवाल पूछे जाएं. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि भारत ने विश्व कप जीता है. इसलिए बातचीत भी उसी खुशी पर होनी चाहिए. उनका यह जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुराने लगे.
दरअसल फाइनल मुकाबला जीतने के बाद भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी अहमदाबाद के बड़े क्रिकेट मैदान के पास स्थित हनुमान मंदिर में पहुंचे थे. वे जीत की ट्रॉफी अपने साथ लेकर वहां दर्शन करने गए थे. खिलाड़ियों को मंदिर जाते देख वहां मौजूद लोगों ने उनका दृश्य अपने उपकरणों में कैद कर लिया. बाद में यही दृश्य लोगों के बीच फैल गया और इस पर चर्चा शुरू हो गई.
पूरे टूर्नामेंट में ईशान किशन का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा. उन्होंने कई मुकाबलों में टीम को तेज शुरुआत दिलाई. प्रतियोगिता में उन्होंने कुल नौ मैच खेले और तीन सौ सत्रह रन बनाए. उनका औसत पैंतीस से अधिक रहा और खेलने की रफ्तार भी काफी तेज थी. पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने सत्तहत्तर रन की शानदार पारी खेली थी. वहीं फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने पच्चीस गेंदों में चौवन रन बनाए. भारत ने उस मैच में दो सौ पचपन रन बनाए और बाद में न्यूजीलैंड को छियानबे रन से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया.
