Pakistan car bomb blast Khyber Pakhtunkhwa: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान में पुलिस चौकी के पास हुए एक भीषण कार बम धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग घायल हो गए. मलबे में तब्दील हुई चौकी पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

Pakistan car bomb blast Khyber Pakhtunkhwa: पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा इलाका एक बार फिर भीषण बम धमाके से दहल उठा है. आतंकवादियों ने इस बार डेरा इस्माइल खान जिले के दराजंदा इलाके में बनी ‘अमन मेला’ पुलिस चौकी को अपना निशाना बनाया. बारूद से भरी एक कार में हुए जोरदार धमाके में पुलिस चौकी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इस खौफनाक हादसे में 12 लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. मृतकों में मासूम दो साल की बच्ची और तीन महिलाएं भी शामिल हैं.
रेस्क्यू टीम ने मलबे से निकाले शव और घायल
धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक इलाका कांप उठा. घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू 1122 की टीमें दराजंदा स्टेशन से तुरंत मौके पर पहुंच गईं. जिला इमरजेंसी अधिकारी मोहम्मद आरिफ खान ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डेरा इस्माइल खान से चार अतिरिक्त एंबुलेंस और राहत दल रवाना किए. मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालकर पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया है. कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है.
तबाही का खौफनाक नजारा और बेजुबानों की भी मौत
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में चारों तरफ मलबे का ढेर और चीख-पुकार दिखाई दे रही है. इस हमले में न सिर्फ पुलिस चौकी पूरी तरह जमींदोज हो गई, बल्कि आसपास की दुकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सड़कों पर इंसानों के साथ-साथ कई बेजुबान जानवर भी मरे हुए पड़े मिले. पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
18 सितंबर को कोहाट की मस्जिद में हुआ था बड़ा हमला
खैबर पख्तूनख्वा में पुलिसकर्मियों और चौकियों को निशाना बनाने का यह कोई नया मामला नहीं है. इससे ठीक कुछ दिन पहले यानी 18 सितंबर को कोहाट जिले के पुलिस मुख्यालय के अंदर बनी मस्जिद को निशाना बनाया गया था. उस समय नमाज के दौरान एक विस्फोटक कार से धमाका किया गया था. उस हमले में 16 पुलिसकर्मियों समेत कुल 31 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी. उस दौरान पुलिस और आतंकियों के बीच करीब 20 घंटे तक मुठभेड़ भी चली थी.
सुरक्षा बलों को ही क्यों निशाना बना रहे हैं आतंकी?
कोहाट और अब दराजंदा में हुए दोनों हमलों में एक बात बिल्कुल साफ है कि आतंकियों का मुख्य मकसद पाकिस्तानी पुलिस बल के मनोबल को तोड़ना है. हालांकि अभी यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी कि दराजंदा और कोहाट के हमलों के पीछे एक ही आतंकी संगठन का हाथ है. लेकिन लगातार हो रहे इन हमलों से यह साबित हो गया है कि इलाके में आतंकियों का नेटवर्क काफी मजबूत है और वे जब चाहे तब बड़ी वारदात को अंजाम दे रहे हैं.
बदहाल कानून व्यवस्था से आम जनता में भारी दहशत
बार-बार हो रहे इन बम धमाकों से खैबर पख्तूनख्वा के स्थानीय नागरिकों में डर और गुस्से का माहौल है. जब पुलिस के ठिकाने ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है. प्रशासन ने पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है. अस्पतालों में आपात स्थिति लागू कर दी गई है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमावर्ती इलाकों में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आतंकी गतिविधियां और बढ़ सकती हैं.
