Akhilesh yadav attacks on yogi: अखिलेश यादव ने अयोध्या दौरे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए उनकी बॉडी लैंग्वेज, भाषण की शैली और मंदिर के चढ़ावे के हिसाब पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

Akhilesh yadav attacks on yogi: अयोध्या के मशहूर राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के ठीक बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उन पर सीधा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर की है. इस पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री के हाव भाव, बातचीत के तरीके और अचानक बने इस दौरे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. अखिलेश के इन तीखे सवालों ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है.
सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री की बॉडी लैंग्वेज पर तंज कसते हुए पूछा कि आखिर अयोध्या के कार्यक्रमों में उनका चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों दिख रहा था. अखिलेश ने लिखा कि मुख्यमंत्री अपनी आवाज को जानबूझकर बहुत ऊंची करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन उनके भीतर आत्मविश्वास बिल्कुल नजर नहीं आ रहा था. उन्होंने मुख्यमंत्री के भाषणों पर उंगली उठाते हुए कहा कि उनके बोलने के अंदाज में बातें कम और धमकियां ज्यादा सुनाई दे रही थीं. अखिलेश ने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री इस बार अयोध्या जाने के बाद अपने ही खास लोगों और करीबियों से क्यों नहीं मिले.
अखिलेश यादव ने इस अचानक तय हुए दौरे के पीछे की वजहों पर भी बड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या यह कार्यक्रम अचानक बना या फिर जिस दिन एसआईटी (SIT) की टीम बनी थी, उसी दिन सब कुछ तय हो गया था. उन्होंने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय बीजेपी विधायकों और बड़े नेताओं की जमीन खिसक रही है. इसी राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए मुख्यमंत्री को अचानक वहां भेजा गया है. अखिलेश ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री खुद वहां जाकर उस जांच टीम के काम को प्रभावित करना चाहते हैं, जो पहले से ही विवादों और संदेह के घेरे में है.
जनता के हक की बात करते हुए सपा प्रमुख ने मांग की कि अब केवल सामान्य बातें करने से काम नहीं चलेगा. अब मंदिर में चढ़ाए गए पैसों, अनमोल पत्थरों, सोने, चांदी और कीमती जेवरों का पूरा हिसाब जनता के सामने आना ही चाहिए. दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के कार्यक्रमों में विपक्ष को कड़ा जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि मंदिर ट्रस्ट के कहने पर ही सरकार ने एसआईटी जांच बिठाई है, जो जल्द ही सारा सच सामने ले आएगी. उन्होंने कहा कि जब हमारे पूर्वजों ने राम मंदिर के लिए 500 साल तक इंतजार किया, तो विपक्ष को भी सिर्फ 15 दिन और सब्र रखना चाहिए. योगी ने यह भी चेतावनी दी थी कि झूठे आरोप लगाने वालों को नोटिस देकर सबूत मांगा जाएगा.
मुख्यमंत्री के इसी बयान पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस विवाद की वजह से अयोध्या के स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बहुत नुकसान पहुंच रहा है. इसलिए जांच टीम को अपनी रिपोर्ट की प्रोग्रेस हर दिन आम जनता के साथ साझा करनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए मांग की कि मुख्यमंत्री ने अयोध्या के जो रिकॉर्ड तोड़ दौरे किए हैं, उसकी भी एक अलग और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. आपको बता दें कि यह पूरा विवाद 7 जून को शुरू हुआ था जब अखिलेश ने करोड़ों रुपये के गबन का दावा किया था. अब 15 दिनों के भीतर इस मामले की रिपोर्ट आनी है, जिससे यूपी की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है.
