pakistan saudi mecca defense pact: इस खबर में जानिए कैसे हूती हमलों के बावजूद पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य मदद देने से पैर पीछे खींच लिए हैं. समझिए ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ का गणित और जानिए क्यों ईरान के डर से पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया है.

pakistan saudi mecca defense pact: मध्य पूर्व में बढ़ते भयानक तनाव के बीच पाकिस्तान का दोहरा रुख पूरी तरह से खुलकर सामने आ गया है. कुछ दिनों पहले तक सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाला पाकिस्तान अब अपने कदम पीछे खींचता नजर आ रहा है. यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमलों के बाद उम्मीद थी कि रक्षा समझौते के तहत इस्लामाबाद कार्रवाई करेगा. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ को एक्टिव करने का बड़ा इशारा दिया था. लेकिन जैसे ही सैन्य मोर्चे पर उतरने की असली परीक्षा सामने आई, पाकिस्तान ने तुरंत बयान बदलते हुए इस पर ब्रेक लगा दिया.
सैन्य कार्रवाई से पीछे हटा पाकिस्तान, कहा- सही समय पर लेंगे फैसला
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हो रहे हमलों के बाद पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी सैन्य कार्रवाई पर बात नहीं हो रही है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में स्थिति पूरी तरह साफ की. उन्होंने कहा कि अभी हूतियों के खिलाफ किसी तरह के सीधे हमले पर विचार नहीं किया जा रहा है. पाकिस्तान ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जब “सही समय” आएगा, तब समझौते के तहत जरूरी कदम उठाए जाएंगे. इस बयान से साफ है कि पाकिस्तान फिलहाल सऊदी को सीधी सैन्य मदद देने के मूड में बिल्कुल नहीं है.
ईरान से दुश्मनी का डर और बीच में फंसने की मजबूरी
पाकिस्तान के अचानक यू-टर्न लेने के पीछे सबसे बड़ी वजह उसकी अपनी रणनीतिक मजबूरी और डर है. हूती विद्रोहियों को खुले तौर पर ईरान का मजबूत समर्थन और आर्थिक मदद हासिल है. दूसरी तरफ पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. अगर पाकिस्तान हूतियों पर सीधा हमला करता है, तो उसके लिए ईरान के साथ रिश्ते हमेशा के लिए बिगड़ जाएंगे. पाकिस्तान ने ईरान से गुजारिश भी की थी कि वह हूतियों को सऊदी पर हमला करने से रोके. लेकिन तेहरान ने साफ कह दिया कि उसका हूतियों पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है.
क्या है ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ जिस पर टिका था सऊदी का भरोसा?
मक्का डिफेंस पैक्ट दरअसल पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ एक बेहद अहम त्रिपक्षीय रक्षा समझौता है. इस पैक्ट की मुख्य शर्त यह है कि तीनों में से किसी भी एक देश पर होने वाला सशस्त्र हमला बाकी दो देशों पर हमला माना जाएगा. इसी समझौते की धौंस दिखाते हुए पाकिस्तान ने पहले हूतियों को कड़े अंजाम भुगतने की धमकी दी थी. लेकिन जब यमन के विद्रोहियों ने सऊदी के दक्षिणी सैन्य एयरबेस और तेल ठिकानों को निशाना बनाकर 73 लोगों को घायल कर दिया, तो पाकिस्तान इस सुरक्षा समझौते के क्रियान्वयन से पूरी तरह से पीछे हट गया.
यमन में गृह युद्ध अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. हूती विद्रोहियों ने अब यमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार वाले अहम बंदरगाह मोखा में घुसपैठ कर ली है. अगर मोखा पर विद्रोहियों का पूर्ण कब्जा हो जाता है, तो लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ सकती है. यह बंदरगाह यमन में भोजन और मानवीय मदद पहुंचाने का सबसे मुख्य जरिया है. इसके अलावा ताइज़ प्रांत के कई सप्लाई रूटों पर भी हूतियों ने कब्जा जमा लिया है, जिससे सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.
सऊदी अरब के भीषण हवाई हमले और गहराता मध्य-पूर्व का संकट
हूती विद्रोहियों के लगातार बढ़ते दुस्साहस के जवाब में सऊदी अरब की वायुसेना ने भी यमन में अपनी कार्रवाई काफी तेज कर दी है. सऊदी समर्थित सेना ने ताइज़, जफ़, होदेइदा और मारिब प्रांतों में विद्रोहियों के ठिकानों पर 40 से ज्यादा विनाशकारी हवाई हमले किए हैं. साल 2022 में हुआ नाजुक युद्धविराम अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है. सऊदी अरब इस समय यमन के मोर्चे पर अकेला पड़ता दिख रहा है, क्योंकि उसका सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाने वाला पाकिस्तान सैन्य मदद से साफ हाथ खींच चुका है.
