Gutkha Ban in Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार ने जन स्वास्थ्य हित में बड़ा कदम उठाते हुए गुटखा, पान मसाला और तंबाकू पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. जानिए इसके नियम.

Gutkha Ban in Uttarakhand: उत्तराखंड की राज्य सरकार ने जन स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है. सरकार ने राज्यभर में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के उत्पादों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. यह रोक आज से यानी ठीक एक साल की अवधि के लिए लागू की गई है. उत्तराखंड के खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं. इस नए आदेश के बाद राज्य के भीतर इन सभी हानिकारक पदार्थों के निर्माण और भंडारण पर रोक लग गई है.
अब राज्य में नहीं होगा किसी भी तंबाकू उत्पाद का उत्पादन
सरकार के इस सख्त आदेश के लागू होने के बाद अब उत्तराखंड की सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति या कंपनी इन हानिकारक पदार्थों का उत्पादन नहीं कर सकेगी. इसके अलावा इन चीजों का स्टॉक या भंडारण करना भी पूरी तरह से अवैध माना जाएगा. बाजार की दुकानों पर भी अब गुटखा और पान मसाला बिकता हुआ नजर नहीं आएगा. यह रोक एक साल के लिए प्रभावी की गई है, जिसका मतलब यह है कि इस मामले में अगला आदेश 13 अक्टूबर, 2027 को जारी किया जाएगा. तब तक राज्य में यह कड़ा प्रतिबंध लगातार जारी रहेगा.
जन स्वास्थ्य के हित में उठाया गया है यह महत्वपूर्ण कदम
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त द्वारा जारी आदेश में यह साफ तौर पर कहा गया है कि आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. खाद्य सुरक्षा तथा मानक विनियम 2011 के नियमों के तहत तंबाकू और निकोटिन युक्त किसी भी प्रकार के गुटखा, पान मसाला या अन्य खाद्य पदार्थों पर रोक लगानी जरूरी थी. बाजार में चाहे यह उत्पाद किसी भी नाम से बेचे जा रहे हों, उन सभी पर आज से अगले एक साल तक के लिए निर्माण, वितरण और खुलेआम बिक्री पर पूरी पाबंदी रहेगी.
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई है यह बड़ी कार्रवाई
यह पूरी पाबंदी खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के तहत कानूनी रूप से लगाई गई है. इस नियम के मुताबिक किसी भी खाद्य उत्पाद में संघटक या सामग्री के रूप में तंबाकू और निकोटिन का इस्तेमाल करने पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है. हम सब जानते हैं कि गुटखा और पान मसाला ऐसे खाद्य उत्पाद हैं जिनमें तंबाकू और निकोटिन को मुख्य सामग्री के रूप में मिलाया जाता है. लोगों के बिगड़ते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन तमाम चीजों पर नकेल कसने का यह कड़ा फैसला लिया है.
आयुक्त के पास होता है जनहित में पाबंदी लगाने का पूरा अधिकार
खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 की धारा 30 की उपधारा दो के अंतर्गत राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को यह विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं. इसके तहत वे आम जनता के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए राज्य के किसी भी हिस्से में या पूरे राज्य में एक साल के लिए किसी भी खाद्य पदार्थ के उत्पादन, भंडारण और बिक्री को रोक सकते हैं. इसी कानूनी अधिकार का उपयोग करते हुए उत्तराखंड शासन ने यह बड़ा कदम उठाया है ताकि युवा पीढ़ी को इन नशीली चीजों के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके.
नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन करेगा सख्त कार्रवाई
सरकार के इस फैसले से राज्य के तंबाकू कारोबारियों और दुकानदारों के बीच हलचल मच गई है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों की टीमें बाजारों में औचक निरीक्षण भी करेंगी ताकि अवैध बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके. उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास निश्चित रूप से राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार लाने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में बहुत मददगार साबित होगा.
