भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का नाम दुनिया में मशहूर है. अब इस मिसाइल की क्षमताओं को मजबूती देने के लिए इसपे काम किया जा रहा है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO और MD डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा है कि कुछ ही सालों में ‘ब्रह्मोस-एनजी को पेश किया जा सकता है.
ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन करने के बाद, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को वैश्विक स्तर पर काफी पहचान मिल रही है. अब इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की ताकत को और बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है. बताया जा रहा है कि अगले 2 से 3 सालों में, 1,500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल का एक नया संस्करण और साथ ही ‘ब्रह्मोस-एनजी’ (BrahMos-NG) पेश किया जा सकता है.
2027 तक प्रोटोटाइप तैयार होने की उम्मीद
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO और MD डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा है कि ब्रह्मोस आज भारत की रक्षा निर्यात रणनीति का प्रमुख हथियार बन चुकी है. उन्होंने बताया कि साल 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के बाद इस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान और मजबूत हुई है. इसके अलावा, नई और हल्की (लगभग 1.3 टन वजनी) ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) मिसाइल का प्रोटोटाइप 2027 या 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है.
वर्तमान में 450 किमी क्षमता वाली मिसाइल
डॉ. जोशी ने बताया कि , फिलीपींस के साथ पहले निर्यात समझौते के बाद इस साल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ भी समझौते किए गए हैं. इससे साफ है कि मित्र देशों के बीच भारतीय रक्षा तकनीक की मांग बढ़ रही है. अब भारत की नजर ब्रह्मोस के अगले संस्करणों पर भी है. माना जा रहा है कि यह कदम भारत की मिसाइल क्षमताओं को काफी मजबूती दे सकता है. फिलहाल, सेना के पास ब्रह्मोस मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 450 किमी तक है.
38,400 करोड़ तक पहुंचा रक्षा निर्यात
जानकारी के मुताबिक 1500 किलोमीटर रेंज वाली ब्रह्मोस और ब्रह्मोस-NG भविष्य में भारत की सैन्य क्षमताओं को नई दिशा दे सकती हैं. ब्रह्मोस-NG को मौजूदा मिसाइल का हल्का और छोटा संस्करण बनाने की योजना है, जिससे इसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करना आसान हो सकेगा. आपको बता दें कि ब्रह्मोस प्रणाली भारत के रक्षा निर्यात का एक प्रमुख स्तंभ भी है. भारत का रक्षा निर्यात ₹38,400 करोड़ तक पहुंच गया है, जो 62.7% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है.
