pm modi address women reservation bill: लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल को दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने (54 वोटों की कमी) के कारण यह पास नहीं हो सका, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए विपक्ष पर इसे रोकने का आरोप लगाया है. प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं से माफी मांगते हुए संकल्प दोहराया कि सरकार हार नहीं मानेगी और इस बिल को पारित कराने के लिए नए विकल्प तलाशेगी.

pm modi address women reservation bill: Narendra Modi ने शनिवार को देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर अपनी प्रतिक्रिया दी. यह बिल Lok Sabha में पास नहीं हो पाया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने करीब 30 मिनट तक देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि इस बिल के गिरने से उन्हें बहुत दुख हुआ है. उनका कहना था कि विपक्ष की राजनीति के कारण यह महत्वपूर्ण बिल पारित नहीं हो सका. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की नारी शक्ति सब कुछ देख रही है. उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि उनका आत्मबल अजेय है और सरकार ने अभी हार नहीं मानी है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए लाया गया था. इसके जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को ज्यादा मौका मिल सकता था. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे पास कराने के लिए पूरी कोशिश की. लेकिन जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया. प्रधानमंत्री के अनुसार यह देश की महिलाओं के सपनों के साथ अन्याय जैसा है. उन्होंने कहा कि नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया और उनके सपनों को झटका लगा है. फिर भी सरकार इस दिशा में आगे प्रयास करती रहेगी.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि Indian National Congress की राजनीति हमेशा से बड़े फैसलों को रोकने की रही है. उनके अनुसार कांग्रेस जरूरी सुधारों को आगे बढ़ाने की जगह उन्हें टालती रहती है. उन्होंने कहा कि कई अहम फैसलों का भी पहले विरोध किया गया था. इसमें Goods and Services Tax, Triple Talaq Law और Article 370 Abrogation जैसे फैसले शामिल हैं. प्रधानमंत्री का कहना था कि कांग्रेस हर बड़े सुधार के रास्ते में बाधा डालती रही है.
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष परिसीमन को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैला रहा है. उन्होंने साफ किया कि इससे किसी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी. बल्कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी. प्रधानमंत्री का आरोप था कि कुछ परिवारवादी दल नहीं चाहते कि आम परिवारों की महिलाएं राजनीति में आगे आएं. उनके अनुसार पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं ने अपनी क्षमता पहले ही साबित कर दी है. अब वे संसद और विधानसभाओं में भी बड़ी भूमिका निभाना चाहती हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण से जुड़ा यह संविधान संशोधन पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था. सदन में कुल 528 वोट पड़े थे. बिल को पारित करने के लिए 352 वोट चाहिए थे. लेकिन इसके समर्थन में 298 वोट ही मिले. इस वजह से 54 वोटों की कमी से बिल पास नहीं हो सका. इसके बाद सत्तारूढ़ दल की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध भी जताया. प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं से माफी मांगते हुए कहा कि यह कोशिश अभी खत्म नहीं हुई है. सरकार आगे भी इस बिल को पास कराने के लिए नए रास्ते तलाशती रहेगी.
