strait of hormuz crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और तेल सप्लाई बाधित होने के कारण वैश्विक बाजार में बहुत बड़े तेल टैंकरों (VLCC) की मांग और किराए में भारी उछाल आया है. इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियों ने स्विट्जरलैंड और सिंगापुर जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से अरबों डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए हैं.

strait of hormuz crisis: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव का सबसे ज्यादा फायदा इस समय China को मिल रहा है. खासतौर पर चीन की शिपिंग और जहाज निर्माण कंपनियां इससे बड़ा मुनाफा कमा रही हैं. दरअसल, युद्ध के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz काफी हद तक बंद हो गया है. यह रास्ता तेल और गैस की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके बंद होने से कच्चे तेल की ढुलाई में मुश्किलें बढ़ गई हैं. कई देश अब एक बार में ज्यादा तेल मंगाने की कोशिश कर रहे हैं. इसी वजह से बड़े तेल टैंकरों की मांग तेजी से बढ़ गई है.
होर्मुज में ईरान की नाकेबंदी और उसके बाद ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. खासकर बहुत बड़े तेल टैंकर यानी Very Large Crude Carrier (VLCC) की मांग तेजी से बढ़ रही है. ये जहाज एक बार में करीब 20 लाख बैरल तक कच्चा तेल ढो सकते हैं. ऐसे टैंकर लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में तेल ले जाने में सक्षम होते हैं. इसलिए कंपनियां अब ज्यादा से ज्यादा VLCC बनवाने के लिए ऑर्डर दे रही हैं.
पिछले करीब आठ हफ्तों से होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही काफी प्रभावित रही है. इस कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं. कई जहाज अब फारस की खाड़ी से गुजरने के जोखिम से बचने के लिए लंबे और सुरक्षित रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे जहाजों की उपलब्धता कम हो गई है और मांग और ज्यादा बढ़ गई है. इसी स्थिति का फायदा चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियां उठा रही हैं. चीन कम लागत में और तेजी से बड़े जहाज तैयार करने की क्षमता रखता है.
हाल के दिनों में कई विदेशी कंपनियों ने चीन के शिपयार्ड्स को बड़े जहाजों के ऑर्डर दिए हैं. स्विट्जरलैंड की कंपनी Advantage Tankers ने चीन में दो बड़े VLCC जहाज बनाने का ऑर्डर दिया है. इन जहाजों की क्षमता करीब 3,07,000 डेडवेट टन होगी. इनकी डिलीवरी 2028 और 2029 में होने की उम्मीद है. वहीं जिनेवा की कंपनी Mercuria Energy Group ने करीब 65 करोड़ डॉलर के जहाज निर्माण कॉन्ट्रैक्ट किए हैं. इस ऑर्डर में चार VLCC और दो बड़े प्रोडक्ट टैंकर शामिल हैं. इसके अलावा सिंगापुर की कंपनी Yangzijiang Maritime Development ने भी आठ बड़े तेल टैंकर बनाने का ऑर्डर दिया है.
मौजूदा प्रोजेक्ट्स को भी इस संकट का फायदा मिल रहा है. उदाहरण के तौर पर एडवांटेज टैंकर्स का एक बड़ा जहाज ‘एडवांटेज विजुअल’ चीन के जियांगसू प्रांत में बन रहा है. इसकी क्षमता करीब 3,19,000 डेडवेट टन है और इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक होने की उम्मीद है. जहाजों की बढ़ती मांग के कारण इनके किराए में भी भारी उछाल आया है. रिपोर्ट के अनुसार VLCC टैंकरों का दैनिक किराया अब करीब 2,34,700 डॉलर तक पहुंच गया है. जहाज निर्माण के क्षेत्र में चीन पहले ही बड़ी ताकत बन चुका है. आंकड़ों के अनुसार दुनिया के लगभग दो-तिहाई जहाज निर्माण कॉन्ट्रैक्ट चीन को मिल रहे हैं, जबकि South Korea की हिस्सेदारी इससे काफी कम रह गई है.
