petrol diesel price hike: पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है. अनुमान है कि 15 मई से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि कंपनियां भारी घाटे का सामना कर रही हैं.

petrol diesel price hike: देश में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव माना जा रहा है. वहां के हालात का असर अब पूरी दुनिया के तेल बाजार पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है. इसी कारण भारत की तेल कंपनियों पर भी दबाव बढ़ गया है. सूत्रों के मुताबिक 15 मई से पहले पेट्रोल और डीजल के दाम में बदलाव किया जा सकता है.
जानकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पहले करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी. लेकिन अब यह बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. इसके बावजूद भारत में अब तक पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं. सरकार और तेल कंपनियां मिलकर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं. बताया जा रहा है कि पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक का अतिरिक्त बोझ उठाया जा रहा है.
होर्मुज है सबसे बड़ी समस्या
दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुए संकट ने तेल सप्लाई को प्रभावित किया है. दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण यह समुद्री रास्ता प्रभावित हुआ है. इसका असर कई देशों में दिखाई दे रहा है. हांगकांग में पेट्रोल लगभग 295 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. सिंगापुर में करीब 240 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल बिक रहा है. इसके मुकाबले भारत में अभी भी कीमतें काफी कम हैं.
कई देशों ने इस संकट से निपटने के लिए उठाए कदम
दुनिया के कई देशों ने इस संकट से निपटने के लिए बड़े कदम उठाए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन राशनिंग शुरू कर दी है. श्रीलंका ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू किया है. पाकिस्तान ने सरकारी दफ्तरों के कामकाजी दिन घटा दिए हैं. वहीं दक्षिण कोरिया ने ईंधन की कीमतों पर सीमा तय कर दी है. भारत में फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं बनी है. यहां न तो ईंधन की कमी हुई है और न ही लंबी लाइनें देखने को मिली हैं.
भारत सरकार ने हालात संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं. घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया गया है. साथ ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी भी कम की गई है. भारत ने रूस अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका जैसे देशों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है. इसके बावजूद तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है.
