CBI Arrests in NEET UG 2026: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर 30 लाख रुपये में पेपर खरीदने और उसे 700 छात्रों तक पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसी अब उन सभी छात्रों और अभिभावकों की पहचान कर रही है जो इस बड़े आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा थे.

CBI Arrests in NEET UG 2026: नीट यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों को लेकर सीबीआई ने बड़ा एक्शन लिया है. जांच एजेंसी ने देश के अलग-अलग शहरों में छापेमारी करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. बताया गया है कि यह कार्रवाई शिक्षा मंत्रालय से मिली शिकायत के बाद शुरू हुई. सीबीआई ने 12 मई 2026 को इस मामले में केस दर्ज किया था. एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और पब्लिक एग्जाम में गड़बड़ी रोकने वाले कानून की धाराएं लगाई गई हैं. इस मामले ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है.
सीबीआई के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जयपुर से तीन, गुरुग्राम से एक और नासिक से एक व्यक्ति शामिल है. पकड़े गए लोगों के नाम शुभम खैरनार, मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल और यश यादव बताए गए हैं. जांच के दौरान कई जगहों पर रेड की गई. वहां से मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए. एजेंसी अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है. सीबीआई राजस्थान एसओजी के साथ मिलकर भी जांच में जुटी हुई है.
जांच में सामने आया है कि जयपुर के रहने वाले मंगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल सगे भाई हैं. वहीं विकास बिवाल, दिनेश का बेटा है और वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था. आरोप है कि दोनों भाइयों ने करीब 30 लाख रुपये देकर पेपर खरीदा था. बाद में वही पेपर दूसरे छात्रों तक भी पहुंचाया गया. बताया जा रहा है कि पेपर की सॉफ्ट कॉपी सीकर में कई छात्रों को बेची गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में लगी हैं कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें और कौन-कौन शामिल था.
सीबीआई की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इस परिवार के चार सदस्य पहले भी नीट परीक्षा में चयनित हो चुके हैं. वहीं नासिक के शुभम खैरनार को कथित तौर पर पुणे से गेस पेपर मिला था. बाद में वही पेपर गुरुग्राम के यश यादव तक पहुंचा. जांच में यह भी दावा किया गया है कि आरोपियों को पहले से अंदाजा था कि परीक्षा का पेपर लीक हो सकता है. इसी आधार पर उन्होंने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी.
इस मामले में देहरादून से पकड़े गए आरोपी राकेश मंडवारिया को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों का कहना है कि उसने करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने में भूमिका निभाई. बताया जा रहा है कि पहले पेपर डिजिटल रूप में भेजा गया और बाद में उसकी प्रिंट कॉपी तैयार करके बेची गई. अब सीबीआई उन छात्रों और अभिभावकों की पहचान कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर पेपर हासिल किया था. मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
