जंतर मंतर पर अपने पहले प्रोटेस्ट की भारी विफलता के बाद अभिजीत दीपके का सारा प्लान धरा रह गया, जिस तरीके से अभिजीत दीपके ये सोच रहे थे कि मैं दिल्ली पहुंचूंगा और देश में क्रांति ला दूंगा, पूरे देश के युवा एक साथ मेरे इशारे पर जंतर-मंतर पर खड़े हो जाएंगे, देश के तमाम युवा मेरे एक इशारे पर सरकार को घेर लेंगे और जो मैं कहूंगा वो करने के लिए तैयार हो जाएंगे… ये सारे जो अभिषेक का देखा हुआ सपना था, वो अचानक से हवा-हवाई हो गया है और अभिजीत दीपके को ये समझ आ गया कि आंदोलन करना इतना आसान नहीं है। भीड़ जुटाना और ट्विटर पर ट्रेंड कराना अलग बात है, और सड़क पर लोगों को अपने मुद्दे से जोड़ना अलग। इनके आंदोलन का जो मुख्य मुद्दा था वो भटक गया। ये आए तो थे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने, लेकिन इनके पहले ही प्रोटेस्ट में शुरू हो गया कुछ और ही। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

प्रोटेस्ट का मुद्दा था पेपर लीक, नारे लगे ब्राह्मणवाद से आजादी
अभिजीत दीपके और उनकी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का दावा था कि वो छात्रों की आवाज उठाने आए हैं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने आए हैं। NEET और पेपर लीक पर सरकार को घेरने आए हैं। लेकिन जंतर-मंतर पर जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया।
- ब्राह्मणवाद से आजादी…
- मनुवाद से आजादी…
- मोदी तुम रिजाइन दो…
- यहां तक की उमर खालिद के समर्थन में भी नारे लग रहे थे।
मतलब मुद्दा कहां गया? पेपर लीक कहां गया? छात्रों की परेशानी कहां गई? प्रोटेस्ट हाईजैक हो गया। जो छात्र धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ सुनने आए थे, उन्हें ‘आजादी-आजादी’ के नारे सुनने पड़े।
क्रांति का सपना हो गया धराशायी
अभिजीत दीपके को लगा था कि उनके एक कॉल पर लाखों युवा जंतर-मंतर भर देंगे। सोशल मीडिया पर वीडियो डाल-डालकर माहौल बनाया था कि ‘दिल्ली हिल जाएगी, कॉकरोच जनता पार्टी के पेज पर 22 मिलियन से भी ज्यादा फॉलोअर्स, लेकिन ग्राउंड पर सीन कुछ और था, गिनती के 5 से 6 हजार लोग ही आए, उनमें भी आधे यूट्यूबर, आधे पुराने ‘आजादी गैंग’ वाले चेहरे, दिल्ली में दिख गया कि कॉकरोच जनता पार्टी को किन युवाओं का समर्थन है। कुछ युवा तो ऐसे देखे गए जो देखने में ही कॉकरोच जैसे दिख रहे थे। अब बताइए इनको किस चीज से आजादी चाहिए? छात्रों के मुद्दे पर बुलाकर विचारधारा का एजेंडा चलाने की कोशिश की गई। नतीजा- पहला शो ही फ्लॉप हो गया।
अब पुणे, लखनऊ, हैदराबाद में होगा फ्लॉप शो!
मतलब अभिजीत दीपके क्या ऐसे छात्रों की आवाज उठा पाएंगे? अब ये जंतर-मंतर वाले प्रोटेस्ट की भारी विफलता के बाद अगला विफलता का केंद्र बनाने जा रहे हैं पुणे, उसके बाद लखनऊ, उसके बाद हैदराबाद, उसके बाद जयपुर, उसके बाद अमृतसर, उसके बाद बेंगलुरु… और उसके बाद ना जाने कहां-कहां। अब अभिजीत दीपके की CJP पुणे, लखनऊ, अमृतसर, बेंगलुरु, जयपुर और हैदराबाद सहित कई शहरों में प्रोटेस्ट करेंगे। अब देखने वाली बात होगी कि उसका कितना असर होता है, या फिर उन रैलियों में फिर से यही नारे लगेंगे। या फिर जो मुद्दा CJP उठा रही थी, उस पर बात होगी?
छात्रों का मुद्दा या पॉलिटिकल एजेंडा?
सवाल ये है कि क्या अभिजीत दीपके सच में छात्रों के लिए लड़ रहे हैं? NEET में धांधली हुई, पेपर लीक हुआ, लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा। ये गंभीर मुद्दा है। इस पर पूरे देश को एक होना चाहिए, लेकिन जब आप छात्रों के मंच से ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ और ‘उमर खालिद जिंदाबाद’ के नारे लगवाओगे, तो आम छात्र आपसे कट जाएगा। उसे अपनी डिग्री चाहिए, नौकरी चाहिए, उसे आपकी विचारधारा से मतलब नहीं है, जंतर-मंतर पर यही हुआ। मुद्दा डायवर्ट हो गया, छात्र कन्फ्यूज हो गए कि ये लड़ाई हमारी है या किसी और की? तो कुल मिलाकर अभिषेक दीपके का ‘दिल्ली चलो, क्रांति करो’ वाला प्लान पहले ही दिन पंक्चर हो गया। सोचा था युवा उनके पीछे चल पड़ेंगे, लेकिन 50 लोग भी ढंग से नहीं जुटे।
सोचा था धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगेंगे, लेकिन नारे लग गए ‘मनुवाद से आजादी’ के। अब पुणे से लेकर हैदराबाद तक का टूर प्लान बना रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है- क्या अगले शहरों में भी छात्रों का मुद्दा हाईजैक होगा? क्या हर जगह ‘आजादी गैंग’ स्टेज पर कब्जा कर लेगा? या अभिजीत दीपके अपनी गलती से सीखकर सिर्फ पेपर लीक, NEET और छात्रों की बात करेंगे? फिलहाल तो जंतर-मंतर ने दिखा दिया कि ट्विटर की क्रांति और सड़क की हकीकत में फर्क होता है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को समझ आ गया होगा कि आंदोलन करना इतना आसान नहीं है। अब देखना है कि पुणे में कितने ‘कॉकरोच’ जुटते हैं और वहां कौन से नारे लगते हैं।
