द ट्रुथ 24 की खबर का असर हुआ है। हमने मांग की थी- जब तक कांग्रेस सड़क पर नहीं उतरेगी, पसीना नहीं बहाएगी, पुलिस से लड़ेगी नहीं, सरकार के खिलाफ मुखर होकर बोलेगी नहीं, तब तक युवाओं के भविष्य के साथ सरकार मजाक करती रहेगी और युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा और अब द ट्रुथ 24 की खबर का असर हुआ है। राहुल गांधी ने ये तय किया है कि अब कांग्रेस AC में बैठकर नहीं, जमीन पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा संभालेगी। NEET पेपर लीक से लेकर महंगाई तक, हर मुद्दे पर अब कांग्रेस सड़कों पर दिखेगी। आइए समझते हैं पूरा प्लान द ट्रुथ 24 की इस रिपोर्ट में।

तीन राज्यों का चुनाव, इसलिए कांग्रेस को आई सड़क की याद?
तो ऐसा तो नहीं है कि द ट्रुथ 24 की मांग को देखते हुए, युवाओं के आक्रोश को देखते हुए और सबसे बड़ी बात- तीन राज्यों का चुनाव करीब है। जिसमें से 2 बड़े राज्य हैं और एक छोटा राज्य है। पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश 403 सीट, दूसरे नंबर पर पंजाब 117 सीट, तीसरे नंबर पर उत्तराखंड 70 सीट।
उत्तराखंड में पिछले 10 साल से कांग्रेस वहां से गायब है। पंजाब भी एक समय कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन कांग्रेस वहां से भी गायब है। और यूपी की बात करें तो इस बार कांग्रेस और सपा साथ लड़ेंगी, इसलिए भी माहौल बनाना चाहते हैं ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फायदा मिल सके, तो तीन राज्यों के मद्देनजर कांग्रेस देशव्यापी प्रदर्शन की बात कर रही है। इस चुनाव में इंडिया गठबंधन का अगुआ होने के नाते अपने आप को साबित करना कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए बहुत जरूरी है।
प्रदर्शन का तरीका क्या है? कौन-कौन होगा शामिल?
इस देशव्यापी प्रदर्शन में कांग्रेस के राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता शामिल होंगे। इतना ही नहीं, इंडिया गठबंधन की पार्टियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं, कांग्रेस की प्लानिंग है कि हर जिले, हर ब्लॉक तक प्रदर्शन पहुंचे। नुक्कड़ सभा, पदयात्रा, धरना, घेराव- हर तरीके से सरकार को घेरा जाएगा। राहुल गांधी खुद कई राज्यों में पदयात्रा कर सकते हैं। प्रियंका गांधी यूपी-पंजाब में मोर्चा संभालेंगी, कांग्रेस लगातार 2 से 3 महीने NEET पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी इन सभी मुद्दों को लेकर ये प्रदर्शन पूरे देश में करेगी।
क्या सिर्फ कांग्रेस शासित राज्यों में होगा प्रदर्शन?
बड़ा सवाल ये है- क्या केवल कांग्रेस शासित राज्यों में करेंगे या फिर बीजेपी शासित राज्यों में भी करेंगे? कांग्रेस का कहना है कि प्रदर्शन पूरे देश में होगा। कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल जैसे कांग्रेस शासित राज्यों के साथ-साथ यूपी, एमपी, गुजरात, बिहार जैसे बीजेपी शासित राज्यों में भी उतनी ही ताकत से प्रदर्शन होगा, खास फोकस यूपी, पंजाब और उत्तराखंड पर रहेगा क्योंकि वहां चुनाव हैं। यूपी में सपा के साथ मिलकर हर विधानसभा में कार्यक्रम होंगे। पंजाब में AAP सरकार के खिलाफ भी कांग्रेस बोलेगी और केंद्र के खिलाफ भी। उत्तराखंड में 10 साल का वनवास खत्म करने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत झोंकेगी।
क्या इस प्रदर्शन से बीजेपी पर कोई असर पड़ेगा?
एक तरफ बीजेपी पीएम मोदी के 12 साल पूरे होने का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अब देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान कर रही है। कांग्रेस का कहना है- ‘देश में महंगाई बढ़ती जा रही है, रसोई गैस के दाम भी बढ़ते जा रहे हैं, परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, पेपर लीक बड़ा मुद्दा है, जरूरी चीजों के दामों में बढ़ोतरी हो रही है।’
कांग्रेस ने कहा कि अगले दो से तीन महीने में हम इन मुद्दों पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। लेकिन सवाल ये भी है- प्रोटेस्ट कहीं कमजोर तो नहीं पड़ेगा? क्योंकि कांग्रेस ने अभी तक कोई ऐसा बड़ा प्रदर्शन नहीं किया है कि जिससे सरकार हिल जाए, 2014 के बाद से कांग्रेस ज्यादातर प्रेस कॉन्फ्रेंस और ट्वीट तक सीमित रही है। भारत जोड़ो यात्रा को छोड़ दें तो सड़क पर लंबी लड़ाई कांग्रेस ने नहीं लड़ी। अब राहुल गांधी के सामने अग्निपरीक्षा है कि क्या वो कार्यकर्ताओं में जोश भर पाएंगे?
3 महीने, 3 मुद्दे, 3 राज्य टारगेट
कांग्रेस की रणनीति साफ है। पहला महीना- NEET पेपर लीक और बेरोजगारी। छात्रों को जोड़ो, यूनिवर्सिटी-कोचिंग सेंटर के बाहर धरना दो। दूसरा महीना- महंगाई। गैस सिलेंडर लेकर, सब्जी की माला पहनकर प्रदर्शन। तीसरा महीना- तीनों चुनावी राज्यों में फाइनल पुश।
हर राज्य में ‘युवा न्याय’, ‘किसान न्याय’, ‘महिला न्याय’ के नाम पर रैली। राहुल गांधी का कहना है- अब डरना नहीं है, पुलिस की लाठी खानी पड़े तो खाएंगे, जेल जाना पड़े तो जाएंगे। तभी सरकार सुनेगी।
इंडिया गठबंधन की बाकी पार्टियां भी साथ आएंगी। सपा यूपी में, AAP पंजाब में नहीं आएगी लेकिन TMC, DMK, RJD अपने राज्यों में समर्थन दे सकती हैं।
तो कुल मिलाकर द ट्रुथ 24 की खबर के बाद कांग्रेस की नींद टूटी है। अब राहुल गांधी AC से निकलकर सड़क पर आने का दावा कर रहे हैं। NEET से लेकर गैस सिलेंडर तक, हर मुद्दे पर 3 महीने का एक्शन प्लान तैयार है।
असली वजह क्या है? युवाओं का दर्द या तीन राज्यों का चुनाव? यूपी में 403, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70 सीटें- कांग्रेस को पता है कि अगर अब नहीं लड़े तो 2027 और 2029 दोनों गए। इसलिए इंडिया गठबंधन के अगुआ होने के नाते राहुल गांधी को खुद को साबित करना है।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी वही है- क्या कांग्रेस का ये प्रोटेस्ट सिर्फ फोटो-ऑप तक रहेगा या सच में सरकार हिलेगी? क्या कार्यकर्ता लाठी खाने को तैयार हैं? क्या राहुल गांधी 2014 वाली कांग्रेस को सड़क की कांग्रेस बना पाएंगे?
अगले 3 महीने बताएंगे कि ये सिर्फ चुनावी स्टंट है या कांग्रेस सच में बदल गई है। क्योंकि बीजेपी जश्न मना रही है और कांग्रेस को अब जंग लड़नी है।
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