वक्फ बोर्ड की शक्तियों, धारा 40 और 85 के विवाद, सरकारी जमीनों पर दावों, बढ़ती वक्फ संपत्तियों और प्रस्तावित संशोधनों को लेकर देशभर में जवाबदेही और पारदर्शिता की बहस तेज हो गई है।

एक समय था जब गांव के बाहर कोई पुराना पेड़ होता था, उसके नीचे एक छोटा सा चबूतरा बना दिया जाता था। कुछ लोग वहां अगरबत्ती जला देते थे। धीरे-धीरे वहां चादर चढ़ने लगी। फिर एक छोटी सी मजार बन गई, कुछ साल बीते तो उसके चारों तरफ दीवार खड़ी हो गई, बिजली का कनेक्शन आ गया, पानी की व्यवस्था हो गई और देखते ही देखते वह जगह एक स्थायी धार्मिक स्थल में बदल गई, यह सिर्फ एक गांव या एक जिले की कहानी नहीं है, देश के कई राज्यों में सालों से ऐसा होता आ रहा है, सरकारी जमीन, सड़क किनारे की जमीन, रेलवे की जमीन, वन विभाग की जमीन और यहां तक कि कुछ सार्वजनिक स्थानों पर भी धीरे-धीरे ऐसी मजारें और मस्जिद खड़े हो गए, इनमें मजारें भी शामिल हैं। भारत की आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद वक़्फ़ बोर्ड बना कैसे? इसकी नींव किसने रखी? और वक़्फ़ बोर्ड के पास इतनी पावर कहां से आई कि वो जिस ज़मीन पर दावा ठोक दे, क्या वक़्फ़ बोर्ड इसलिए बनाया गया था कि मजार और मस्जिद बनवाकर भारत की जमीनों पर अवैध क़ब्ज़ा किया जा सके? और आख़िर दिन पर दिन वक़्फ़ की प्रॉपर्टी कैसे बढ़ती जा रही है? इन सारे सवालों के जवाब तलाशते हैं द ट्रुथ 24 की इस खास रिपोर्ट में ….
वक्फ बोर्ड की शुरुआत कब और किसने की?
इस्लाम में वक्फ का मतलब है… अल्लाह के नाम पर कोई संपत्ति धार्मिक या परोपकारी काम के लिए हमेशा के लिए दान कर देना। भारत में मुगल काल से वक्फ संपत्तियां थीं, लेकिन कानूनी ढांचा अंग्रेजों के समय बना। 1913 में मुसलमान वक्फ वैधकरण अधिनियम’ पास हुआ, इसे लाने वाले थे मोहम्मद अली जिन्ना, तब वो मुस्लिम लीग में नहीं, कांग्रेस में थे, 1912 के एक प्रिवी काउंसिल के फैसले ने वक्फ-ए-औलाद को अमान्य कर दिया था, जिन्ना ने बिल लाकर उसे फिर से कानूनी मान्यता दिलाई, आज़ादी के बाद 1954 में पहला वक्फ अधिनियम बना, फिर 1995 में नया वक्फ अधिनियम 1995′ आया, यही आज का मुख्य कानून है। 2013 में UPA की सरकार ने इसमें संशोधन करके वक्फ बोर्ड की शक्तियां और बढ़ा दीं थी।
वक्फ बोर्ड किस बिल और अनुच्छेद के अंतर्गत है?
वक्फ बोर्ड किसी अनुच्छेद के तहत सीधे संविधान में नहीं बना है, ये वक्फ अधिनियम 1995 के तहत बना एक वैधानिक निकाय है, संविधान का अनुच्छेद 26 हर धार्मिक समुदाय को अपनी धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन करने का अधिकार देता है, वक्फ बोर्ड को इसी के तहत चलाने का तर्क दिया जाता है, हर राज्य में एक वक्फ बोर्ड होता है और केंद्र में केंद्रीय वक्फ परिषद, इनका काम वक्फ संपत्तियों का रखरखाव और सुरक्षा करना है।
छूते ही जमीन वक्फ की, ये पावर कहां से आई?
ये सबसे बड़ा विवाद है, वक्फ बोर्ड जिस जमीन पर दावा ठोक दे, वो उसकी हो जाती है, इसकी वजह है, वक्फ एक्ट 1995 की धारा 40, धारा 40 कहती है कि वक्फ बोर्ड खुद तय कर सकता है कि, कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं, अगर बोर्ड को लगता है कि, कोई जमीन वक्फ की है, तो वो जांच करके उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है, इसके बाद जिसके पास जमीन है, उसे वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर साबित करना पड़ता है कि जमीन उसकी है, ट्रिब्यूनल का फैसला ही आखिरी होता है। धारा 85 के तहत सिविल कोर्ट में इसे चुनौती नहीं दी जा सकती, सिर्फ हाईकोर्ट में रिट पड़ सकती है, यानी केस उल्टा चलता है। पहले बोर्ड दावा करता है, फिर मालिक को सफाई देनी पड़ती है, इसी वजह से बोर्ड के पास असीमित पावर है, इसी वजह से देश में रोड किनारे, रेलवे ट्रैक के बीच में, जंगल में जहां-तहां मजार-मस्जिद दिख जाते हैं।
क्या कब्जे के लिए बनाया गया था वक्फ बोर्ड?
कानून के मुताबिक तो वक्फ बोर्ड कब्जे के लिए नहीं बनाया गया था, वक्फ एक्ट 1995 का मकसद है, मुस्लिम समुदाय द्वारा दान की गई संपत्ति की देख रेख करना था, ताकि इस पैसे से मस्जिद, कब्रिस्तान, मदरसा, यतीमखाने, गरीबों की मदद की जा सके, वक्फ संपत्ति बिक नहीं सकती, ये हमेशा के लिए अल्लाह के नाम पर होती है, कोई मुसलमान अपनी निजी संपत्ति वक्फ करता है, तो वो वक्फ बोर्ड की देखरेख में आ जाती है, तो मकसद कब्जा करना नहीं, दान की गई संपत्ति को संभालना था, लेकिन आरोप लगता है कि, धारा 40 का गलत इस्तेमाल करके कई बार सरकारी और निजी जमीनों पर दावा कर दिया गया, तमिलनाडु का पूरा तिरुचेंथुरई गांव, सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की बिल्डिंग पर दावा इसी के उदाहरण बताए जाते हैं।
दिन-ब-दिन प्रॉपर्टी कैसे बढ़ रही है?
आज वक्फ बोर्ड के पास 9.4 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन है, रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद ये देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक है।
संपत्ति बढ़ने की 3 बड़ी वजहें हैं
लोगों के संपत्ति दान करने से वक्फ की संपत्ती बढ़ रही है
सरकार ने वक्फ संपत्तियों का 1954 के बाद सर्वे कराया, जो संपत्तियां रिकॉर्ड में आईं, वो बोर्ड की हो गईं।
धारा 40 का इस्तेमाल करके बोर्ड ने सर्वे कराकर हजारों संपत्तियों को वक्फ घोषित किया, अगर किसी ने समय पर चुनौती नहीं दी, तो वो वक्फ की हो गई।
सच्चर कमेटी 2006 ने कहा था कि, वक्फ की 60% से ज्यादा संपत्ति पर कब्जा है या उसका गलत इस्तेमाल हो रहा है, यानी बोर्ड के पास जमीन है, लेकिन आम मुसलमान को फायदा नहीं मिल रहा।
कानून या खामी?
वक्फ बोर्ड अंग्रेजों के जमाने से है, जिन्ना ने 1913 में पहला कानून बनवाया, आज़ादी के बाद 1954 और 1995 में एक्ट बने, 2013 में इसकी ताकत बढ़ी, छूते ही जमीन वक्फ बोर्ड की, वाली ताकत धारा 40 और 85 से आती है, ये कानून संसद ने बनाया, तो वक्फ पावर भी संसद ने दी है, वक्फ बोर्ड कब्जे के लिए नहीं, दान की संपत्ति संभालने के लिए बना था, लेकिन कानून की खामियों का आरोप लगता रहा, इसी वजह से 2024 में सरकार वक्फ संशोधन विधेयक लाई। इसमें धारा 40 हटाने और ट्रिब्यूनल के फैसले को सिविल कोर्ट में चुनौती देने का प्रस्ताव है, सवाल वक़्फ़ का नहीं, जवाबदेही का है। अगर कानून में एकतरफा ताकत है तो, उसे संतुलित करना चाहिए, ताकि ना किसी की जमीन गलत तरीके से जाए, ना सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा सके और ना ही गरीबों के लिए दान की गई संपत्ति बर्बाद हो, क्योंकि कानून का मकसद इंसाफ है, कब्जा नहीं।
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