Sharad pawar ncp merger talks: महाराष्ट्र में विपक्षी ताकत को एकजुट करने के लिए कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के बीच शुरुआती स्तर पर मर्जर की गंभीर बातचीत चल रही है.

Sharad pawar ncp merger talks: महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर आ रही है. वहां कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी यानी एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के बीच आपस में जुड़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. दोनों पार्टियां मिलकर एक होने यानी विलय करने के लिए लगातार बातचीत कर रही हैं. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह बातचीत अभी सिर्फ महाराष्ट्र के नेताओं के बीच ही हो रही है. शरद पवार की पार्टी के बड़े नेता पहले अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर आम सहमति बनाने की कोशिश में जुटे हैं.
अंदर की बात यह है कि जब महाराष्ट्र के स्तर पर सब कुछ फाइनल हो जाएगा, तब यह मामला दिल्ली भेजा जाएगा. वहां दोनों पार्टियों के सबसे बड़े नेताओं के बीच मुलाकात होगी और इस फैसले पर आखिरी मुहर लगाई जाएगी. फिलहाल यह पूरी बातचीत बिल्कुल शुरुआती दौर में है. यही वजह है कि दोनों में से किसी भी दल ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान या घोषणा नहीं की है. वैसे आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी इन दोनों पार्टियों के विलय को लेकर ऐसी ही चर्चाएं उठी थीं.
उस समय दोनों पार्टियों के आलाकमान ने इस मुद्दे पर गंभीर बातचीत भी की थी. लेकिन ऐन वक्त पर राज्य में विधानसभा चुनाव आ गए. चुनावी तैयारियों और उस समय के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बातचीत को बीच में ही रोकना पड़ा था. कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी बहुत लंबे समय से एक दूसरे के पक्के साथी रहे हैं. दोनों पार्टियां मिलकर महाराष्ट्र में ‘महाविकास अघाड़ी’ गठबंधन के तहत सरकार भी चला चुकी हैं और विपक्ष में भी साथ खड़ी हैं.
अगर इस बार इन दोनों पार्टियों के विलय की बात सच साबित होती है और यह आगे बढ़ती है, तो इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर बहुत गहरा असर पड़ेगा. विपक्षी खेमे की पूरी ताकत एक ही झंडे के नीचे आ जाएगी. इससे आने वाले समय के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं. फिलहाल राज्य के सभी राजनीतिक पंडितों की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि महाराष्ट्र की यूनिट में सहमति कब तक बनती है. इसके बाद देखना होगा कि दिल्ली में बैठा शीर्ष नेतृत्व इस बड़े प्रस्ताव को हरी झंडी देता है या नहीं.
इस संभावित विलय का असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा. इसका बड़ा प्रभाव आने वाले लोकसभा और विधानसभा दोनों ही चुनावों पर साफ़ दिखाई देगा. भाजपा और उसके सहयोगियों के खिलाफ विपक्ष को एक मजबूत और एकजुट चेहरा मिल सकता है. शरद पवार का राजनीतिक कद और कांग्रेस का पुराना जनाधार मिलकर राज्य में एक नया सियासी तूफान खड़ा कर सकते हैं. अब देखना यही है कि आने वाले दिनों में ऊंट किस करवट बैठता है और इस बातचीत का क्या नतीजा निकलता है.
