Demolitions of gurdwara: पाकिस्तान के फारूकाबाद में ऐतिहासिक गुरुद्वारा ढहाए जाने पर भारत ने सख्त आपत्ति जताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पवित्र स्थल के तुरंत पुनर्निर्माण की मांग की है.

Demolition of gurdwara: पाकिस्तान से एक बहुत ही परेशान करने वाली खबर सामने आई है. वहां के फारूकाबाद में करीब 125 साल पुराना एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है. इस पवित्र स्थल का नाम ‘गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब’ है. खबरों के मुताबिक इस गुरुद्वारे के कुछ हिस्सों को पूरी तरह से ढहा दिया गया है. इस घटना के सामने आने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है. भारत ने इसे एक बेहद दुखद और सोची समझी साजिश के तहत की गई तोड़फोड़ बताया है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर अपनी गहरी नाराजगी जताई है. भारत सरकार ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में खरी खोटी सुनाई है. विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के इस पवित्र और ऐतिहासिक स्थल को नुकसान पहुंचाना बेहद निंदनीय है. भारत ने पाकिस्तान सरकार से इस मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. भारत चाहता है कि इस घटिया हरकत को अंजाम देने वाले गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा मिले.
भारत ने सिर्फ कार्रवाई की मांग ही नहीं की है बल्कि गुरुद्वारे को फिर से ठीक करने को भी कहा है. भारत सरकार ने पाकिस्तान से अपील की है कि गुरुद्वारे के जिन हिस्सों को तोड़ा गया है, उनका दोबारा निर्माण कराया जाए. पवित्र स्थल को जल्द से जल्द उसके पुराने स्वरूप में वापस लाया जाए. इस पूरे मामले में पाकिस्तान के स्थानीय प्रशासन और वहां के ‘इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ के रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. उनकी चुप्पी और ढीले रवैये से भारत बेहद चिंतित है.
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ी बात कही है. भारत ने ध्यान दिलाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है. पाकिस्तान से ऐसी खबरें लगातार आती रहती हैं. वहां पर धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों और उनके पूजा स्थलों को बार बार निशाना बनाया जा रहा है. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. स्थानीय अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना यह दिखाता है कि वहां अल्पसंख्यकों की आस्था की कोई कद्र नहीं है.
आखिर में भारत ने पाकिस्तान सरकार को अपनी ज़िम्मेदारी याद दिलाई है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान को अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की जान माल और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा हर हाल में तय करनी चाहिए. पाकिस्तान को अपने यहां बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता और नफ़रत के माहौल को पूरी तरह खत्म करना होगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना के बाद पाकिस्तान की काफी थू थू हो रही है और सिख समुदाय में भारी आक्रोश है.
