US-Iran War Update: ईरान के बिजली घरों और पुलों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में तेहरान ने कतर और कुवैत पर मिसाइलें दागकर वहां के पानी साफ करने वाले प्लांट को तबाह कर दिया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

US-Iran War Update: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है. एक तरफ जहां लोग सोच रहे थे कि अमेरिकी सेना सिर्फ ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल डिपो को निशाना बनाएगी, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी फाइटर जेट ईरान के बिजली घरों, पुलों, रेलवे नेटवर्क और पानी को साफ करने वाले नागरिक संयंत्रों (वॉटर प्यूरीफिकेशन प्लांट्स) को तबाह कर रहे हैं. ईरान का सीधा आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर उसके आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं को खत्म कर रहा है ताकि देश में हाहाकार मचे और ईरान घुटने टेककर बातचीत के लिए मजबूर हो जाए. आइए इस पूरे मामले के पीछे की खतरनाक रणनीति और इसके चलते खाड़ी देशों में पैदा हुए नए संकट को आसान शब्दों में समझते हैं.
अमेरिका की दोहरी नीति पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की साख और उसकी नीतियों पर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब रूस ने यूक्रेन के पावर ग्रिड और पुलों को उड़ाया था. उस समय अमेरिका ने रूस की कड़ी आलोचना की थी और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया था. इसी के चलते रूसी राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICC) से वारंट भी जारी हुआ. लेकिन आज वही अमेरिका खुद ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और नागरिक संपत्तियों पर ताबड़तोड़ बम बरसा रहा है, जिससे दुनिया भर में उसकी इस दोहरी नीति की जमकर आलोचना हो रही है.
क्या है अमेरिका का ‘ड्यूल यूज इंफ्रास्ट्रक्चर’ वाला बहाना
नागरिक ठिकानों पर हो रहे इन हमलों को सही ठहराने के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने एक नया तर्क ढूंढ निकाला है. डिफेंस की भाषा में इसे ‘ड्यूल यूज इंफ्रास्ट्रक्चर’ (यानी दोहरे इस्तेमाल वाला ढांचा) कहा जाता है. अमेरिका का दावा है कि दक्षिणी ईरान के होर्मोजगन प्रांत में जिन पुलों, सड़कों और बिजलीघरों को उसने निशाना बनाया है, उनका इस्तेमाल सिर्फ आम जनता नहीं कर रही थी. अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी सेना इन नागरिक ठिकानों की आड़ में अपने सैनिकों को छिपा रही थी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाके में हथियारों की सप्लाई के लिए इन रास्तों का इस्तेमाल कर रही थी.
कतर और कुवैत को प्यासा मारने की तेहरान की तैयारी
अमेरिका के इन हमलों से बौखलाए ईरान ने अब मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर अपनी मिसाइलों का रुख कर दिया है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर और कुवैत जैसे देशों पर मिसाइलें दागी हैं. कतर इस पूरे विवाद में दोनों देशों के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह भी इस गुस्से की चपेट में आ गया. वहीं कुवैत पर हुए हमले में वहां के एक बेहद महत्वपूर्ण डिसैलिनेशन प्लांट (समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले कारखाने) को भारी नुकसान पहुंचा है. ईरान की इस रणनीति से खाड़ी देशों में पीने के पानी का एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
जनता के गुस्से को हथियार बनाने की कोशिश
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की इस रणनीति के पीछे एक बहुत सोची-समझी चाल छिपी है. जब किसी देश में बिजली, पानी और ट्रांसपोर्ट जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप हो जाती हैं, तो वहां की आम जनता त्राहि-त्राहि कर उठती है. अमेरिका को उम्मीद है कि बुनियादी चीजों के लिए तरस रही ईरान की जनता अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आएगी और देश के भीतर तख्तापलट या विद्रोह की स्थिति बन जाएगी. हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी सेना को ढाल बनाने के अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज करता है.
काम की बातें: खाड़ी संकट के बीच सुरक्षा और सतर्कता के नियम
सफर करने से बचें: यदि आप या आपका कोई परिचित इस समय खाड़ी देशों (विशेषकर ईरान, कतर या कुवैत) की यात्रा की योजना बना रहा है, तो मौजूदा सैन्य तनाव को देखते हुए इसे तुरंत टाल दें.
आधिकारिक दूतावास के संपर्क में रहें: इन प्रभावित इलाकों में रह रहे भारतीय नागरिक तुरंत स्थानीय भारतीय दूतावास (Embassy) में अपना रजिस्ट्रेशन कराएं और उनकी ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें.
आपातकालीन संसाधनों का संचय: युद्धग्रस्त या तनाव वाले क्षेत्रों में रह रहे लोग पीने के पानी, जरूरी दवाओं और सूखे राशन का बैकअप जरूर अपने पास रखें.
