Pakistan Kuwait Defence Deal: सऊदी अरब में हमलों को रोकने में नाकाम रहने के बाद अब पाकिस्तान ने कुवैत के साथ एक बड़ी डिफेंस डील के लिए बातचीत शुरू की है, जिसके तहत वह सैन्य मदद के बदले कुवैत से भारी निवेश और तेल चाहता है.

Pakistan Kuwait Defence Deal: पाकिस्तान अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच अब खाड़ी देशों में अपनी सैन्य ताकत का सौदा करने में जुट गया है. सऊदी अरब को सुरक्षा देने का वादा करने और वहां ईरान समर्थित हमलों को रोकने में नाकाम रहने के बाद अब पाकिस्तान ने कुवैत की तरफ हाथ बढ़ाया है. रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और कुवैत के बीच एक बहुत बड़े डिफेंस डील (रक्षा समझौते) को लेकर शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है. इस डील के जरिए पाकिस्तान कुवैत की सुरक्षा का जिम्मा उठाने की तैयारी कर रहा है. इसके बदले में वह अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कुवैत से भारी निवेश और ईंधन (तेल) चाहता है. आइए समझते हैं कि इस नए रक्षा समझौते के पीछे दोनों देशों का क्या गणित है.
कुवैत को चाहिए सऊदी अरब जैसा सुरक्षा कवच
कुवैत इस समय अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है क्योंकि हाल के दिनों में उस पर कई हवाई हमले हुए हैं. यही वजह है कि कुवैत अब पाकिस्तान के साथ बिल्कुल वैसा ही रक्षा समझौता करना चाहता है जैसा पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ है. कुवैत की मांग है कि पाकिस्तान अपने लड़ाकू सैनिक उसके देश में तैनात करे. साथ ही उसे लड़ाकू विमान, आधुनिक ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम जैसी सैन्य सुविधाएं मुहैया कराए. हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि वे कुवैत की मदद तो करना चाहते हैं, लेकिन अभी वहां अपने लड़ाकू सैनिक भेजने पर अंतिम सहमति नहीं बनी है.
सऊदी अरब के मामले में फेल रहा है पाकिस्तान का फॉर्मूला
इस पूरे समझौते पर अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों ने बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. असल में, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा का भी ठेका ले रखा था और दोनों के बीच आपसी रक्षा समझौता है. लेकिन हाल ही में जब ईरान ने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और तेल संयंत्रों पर भीषण मिसाइल हमले किए, तो पाकिस्तान मूकदर्शक बना रहा. उसने सऊदी की रक्षा में अपनी सेना का कोई इस्तेमाल नहीं किया. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जो पाकिस्तान अपने सबसे बड़े मददगार सऊदी अरब को सुरक्षा नहीं दे पाया, वह कुवैत की रक्षा खाक करेगा.
सुरक्षा के बदले तेल और निवेश की मजबूरी
पाकिस्तान इस समय भयंकर आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और इस डील के पीछे उसका असली मकसद अपनी तिजोरी भरना है. रक्षा सहयोग के बदले में पाकिस्तान ने कुवैत के सामने शर्त रखी है कि वह उसके देश में भारी निवेश करे और उसकी ऊर्जा सुरक्षा (ईंधन की जरूरत) की गारंटी ले. कुवैत अब पाकिस्तान के भीतर एक बड़ा तेल और ईंधन भंडारण (फ्यूल स्टोरेज) केंद्र बनाने की संभावना तलाश रहा है. अगर ऐसा होता है, तो दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे डीजल सप्लाई के सरकारी समझौते को और मजबूती मिलेगी, जिससे पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था संभालने में थोड़ी मदद मिल सकती है.
मध्य पूर्व में बन रहा है नया सैन्य गठबंधन
रॉयटर्स की रिपोर्ट से यह भी साफ हुआ है कि पाकिस्तान सिर्फ कुवैत तक ही सीमित नहीं है. वह मध्य पूर्व के कई अन्य मुस्लिम देशों में अपनी मिलिट्री सर्विस बेचने की कोशिश में है. इस समय तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब मिलकर एक अलग त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के मसौदे पर तेजी से काम कर रहे हैं. इसके अलावा बहरीन और जॉर्डन जैसे छोटे खाड़ी देश भी पाकिस्तान से हथियार खरीदने और अपने सैनिकों को ट्रेनिंग दिलाने के लिए बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के चलते इन समझौतों का भविष्य अधर में लटक सकता है.
काम की बातें: विदेशी रक्षा समझौतों और भारत पर इसका असर
क्षेत्रीय संतुलन पर नजर: पाकिस्तान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते सैन्य रिश्तों पर भारत का विदेश मंत्रालय और रक्षा खुफिया एजेंसियां लगातार अपनी कड़ी नजर बनाए रखती हैं.
भारत-कुवैत मजबूत संबंध: भारत और कुवैत के बीच व्यापारिक और राजनयिक संबंध हमेशा से बहुत मजबूत रहे हैं. कुवैत में लाखों भारतीय काम करते हैं, इसलिए वहां की सुरक्षा भारत के लिए भी बेहद अहम है.
आधिकारिक बयानों का महत्व: इस तरह के अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों की पुष्टि तभी मानी जाती है जब दोनों देशों की सरकारें आधिकारिक तौर पर इस पर हस्ताक्षर कर देती हैं.
