BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. मायावती, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया.
यूपी के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है. वे बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक थे. उमाशंकर सिंह को पूर्वांचल के कद्दावर नेताओं में गिना जाता है. उनके निधन पर कई राजनेताओं ने शोक जताया है.
बलिया/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम निधन हो गया. वे लंबे समय से कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके अचानक चले जाने से पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारे और उनके समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है.।
दिग्गजों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: “प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
बसपा प्रमुख मायावती: बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि उनके परिवार और उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना. मायावती के अलावा सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने और यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी दुख जताया.
“उमाशंकर जी पार्टी के बेहद कर्मठ, ईमानदार व वफादार साथी थे। उनके निधन की खबर अति-दुखद है। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा अतुलनीय थी।”
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव: “अत्यंत दुखद! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।”
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना: “उनका निधन प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। जनसेवा और सादगी के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।”
2022 में BSP को दिलाई थी एकमात्र जीत
उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी ने दोबारा पूर्ण बहुमत हासिल किया और बसपा महज़ एक सीट पर सिमट गई थी, तब रसड़ा सीट से उमाशंकर सिंह ही वो एकमात्र नेता थे जिन्होंने बहुजन समाज पार्टी का परचम लहराया था.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर
बलिया के नगरा थाना क्षेत्र स्थित खनवर गांव के रहने वाले उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर काफी जमीनी रहा.
1991: बलिया के प्रतिष्ठित सतीश चंद्र कॉलेज से छात्र संघ का चुनाव जीतकर महामंत्री बने.
2000: जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता और स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई.
2009: ‘छत्रपति इंफ्रा कंस्ट्रक्शन’ नाम से व्यवसाय की शुरुआत की.
2011: बसपा प्रमुख मायावती के संपर्क में आए और पार्टी की सदस्यता ली. इसके बाद 2012 से लगातार रसड़ा सीट से चुनाव जीतते आ रहे थे.
