Mirza Fakhrul Islam Alamgir: इस लेख में जानिए बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के प्रोफेसर से राजनेता बनने, 1971 में भारत में शरण लेने और उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष की पूरी कहानी.

Mirza Fakhrul Islam Alamgir: बांग्लादेश की राजनीति में एक नया और बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है. लंबे समय तक संघर्ष करने वाले वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति बन गए हैं. वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के काफी पुराने और अनुभवी नेता माने जाते हैं. संसद में हुए चुनाव में उन्होंने विपक्षी प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को बड़े अंतर से हरा दिया. कुल 349 सांसदों के वोटों में से फखरुल को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के खाते में सिर्फ 88 वोट ही आए.
प्रोफेसर से शुरू हुआ था सफर
फखरुल का जन्म 26 जनवरी 1948 को ठाकुरगांव में हुआ था. उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में बीए और एमए की पढ़ाई पूरी की. अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद वे सिविल सेवा में आए और 1972 से कॉलेज में इकोनॉमिक्स पढ़ाने लगे. इसके बाद 1986 में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से राजनीति के मैदान में उतर गए. छात्र जीवन में 1960 से शुरू हुआ उनका यह सफर आज उन्हें देश के सबसे बड़े पद यानी राष्ट्रपति भवन तक ले आया है.
1971 के युद्ध में भारत में ली थी शरण
साल 1971 में जब बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम चल रहा था, तब हालात बहुत खराब थे. उस दौरान पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से बचने के लिए फखरुल को कुछ समय के लिए भारत में शरण लेनी पड़ी थी. भारत में रहते हुए उन्होंने आजादी के लड़ाकों और वामपंथी संगठनों के साथ मिलकर अपने देश की आजादी की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई. आजादी मिलने के बाद वे वापस अपने वतन लौट गए और जनसेवा के कामों में पूरी तरह से जुट गए.
BNP के सबसे बड़े संकटमोचक
फखरुल इस्लाम करीब 15 सालों से अपनी पार्टी BNP में दूसरे सबसे बड़े नेता की भूमिका निभा रहे थे. जब शेख हसीना की सरकार के दौरान पार्टी अध्यक्ष खालिदा जिया जेल में थीं और तारिक रहमान देश से बाहर थे, तब फखरुल ने ही पूरी पार्टी को संभाला था. उस मुश्किल दौर में उन्होंने जमीन पर रहकर कार्यकर्ताओं का हौसला टूटने नहीं दिया. उन्होंने पार्टी को बिखरने से बचाया और किसी भी तरह की बगावत को पनपने नहीं दिया.
छात्र नेता से राष्ट्रपति बनने की पूरी टाइमलाइन
फखरुल ने 1960 में छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद 1988 में वे ठाकुरगांव नगर पालिका के चेयरमैन बने. 1990 में उन्होंने BNP की सदस्यता ली और 2001 में पहली बार सांसद चुने गए. 2001 से 2006 के बीच वे केंद्र सरकार में कृषि और पर्यटन जैसे मंत्रालयों के राज्य मंत्री रहे. 2011 में वे पार्टी के कार्यवाहक महासचिव बने और 2016 में पूर्णकालिक महासचिव चुने गए. अब 2026 में वे देश के राष्ट्रपति पद पर काबिज हो चुके हैं.
11 बार जेल और 100 से ज्यादा केस
फखरुल का यह मुकाम आसानी से नहीं मिला है. विपक्ष में रहते हुए उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा. पार्टी का दावा है कि उन्हें अपने करियर में 11 बार जेल जाना पड़ा और उन्होंने करीब साढ़े तीन साल सलाखों के पीछे बिताए. उनके खिलाफ 100 से ज्यादा मुकदमे भी दर्ज हुए. लेकिन इन तमाम परेशानियों के बाद भी उन्होंने कभी अपनी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा. इसी निष्ठा की वजह से आज पूरे देश ने उन्हें राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार किया है.
