श्रीनगर की सेंट्रल जेल में बंद 2 कैदी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गए. इस घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि पिछले 6 सालों में जेल से सामने आई ये पहली ऐसी घटना है. पुलिस ने फरार कैदियों की तलाश शुरू लड़ दी है.
श्रीनगर की हाई-सिक्योरिटी सेंट्रल जेल से POCSO एक्ट के दो कैदी भाग गए. अलग-अलग मामलों में बंद विचाराधीन कैदी दीवार फांदकर भाग निकले. यह बीते 6 साल में पहली ऐसी घटना है जब सेंट्रल जेल से ऐसे कोई कैदी भागने में सफल हो पाए हैं. आम अपराधियों और आतंकियों की बैरक अलग-अलग होती हैं.
केटेगरी के हिसाब से मिलती बैरेक
जानकारी के मुताबिक आतंकी मामलों में बंद लोग चाहे पब्लिक सेफ्टी एक्ट, UAPA के तहत गिरफ्तार आतंकी समर्थक पूरी तरह सुरक्षित सेल्स में रखे जाते हैं. यहां आम क्रिमिनल घुस भी नहीं सकते. जेल मैनुअल के मुताबिक हर कैदी की एक कैटिगरी होती हैं और उसी हिसाब से उसको बैरेक दी जाती हैं.
पुलिस ने जारी किया वांटेड नोटिस
आपको बता दें कि साल 2018 में आतंकी नवीद भट जेल से श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल ले जाने के बाद अस्पताल से भागने में सफल हुआ था. इस घटना के बाद से जेल की सुरक्षा को ज्यादा मजबूत किया गया था. मामले में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि भागे हुए दोनों कैदियों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया है. इसके साथ ही पुलिस ने ‘वॉन्टेड’ नोटिस भी जारी किए हैं और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की है.
कौन हैं फरार होने वाले कैदी?
बताया जा रहा है कि भागने वालों की पहचान राजस्थान के सदनपोरा निवासी फरमान खान और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के सांगलन चित्तरगुल का रहने वाले मुख्तार अहमद गुर्जर के रूप में की गई है. अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों को ढूंढने और पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस ने ‘वॉन्टेड’ नोटिस भी जारी किए हैं और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की है. अधिकारीयों के मुताबिक खान 23 जून से जेल में बंद था. उस पर गांदरबल जिले के लार पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और POCSO एक्ट की धारा 3 और 4 (जो पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट से संबंधित हैं) के तहत FIR दर्ज की गई थी.
