kanpur cyber fraud 5600 crore: इस खबर में जानिए कानपुर साइबर पुलिस द्वारा 5600 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन वाले अंतरराज्यीय गिरोह के भंडाफोड़ की पूरी कहानी। समझिए कैसे फर्जी फर्मों और 72 बैंक खातों के जरिए 12 राज्यों में ठगी को अंजाम दिया जाता था।

kanpur cyber fraud 5600 crore: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर क्राइम पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. ये आरोपी फर्जी फर्में और बोगस बैंक खाते बनाकर लोगों को निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देते थे. जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के खातों में लगभग 5,600 करोड़ रुपये का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुआ है. ठगी के पैसों को छिपाने के लिए ये शातिर गेमिंग ऐप्स और अलग-अलग खातों का इस्तेमाल करते थे.
कानपुर के बेगमगंज और चमनगंज से पकड़े गए दो शातिर आरोपी
कानपुर साइबर पुलिस के हत्थे चढ़े दोनों आरोपी स्थानीय निवासी ही हैं. पकड़े गए आरोपियों की पहचान शाहबाज वारसी और सलमान के रूप में हुई है. 24 साल का शाहबाज वारसी बेगमगंज इलाके की रेल पटरी का रहने वाला है. वहीं 31 साल का सलमान चमनगंज इलाके का निवासी है. पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है. इसके साथ ही इस अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सिंडिकेट के असली आकाओं और मुख्य आर्थिक लेनदेन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
कैश समेत आईपैड, मोबाइल और 72 संदिग्ध बैंक खाते बरामद
पुलिस को आरोपियों के पास से 65 लाख 26 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं. इसके अलावा दो आईपैड, तीन महंगे एंड्रॉयड फोन, दो एटीएम कार्ड और बैंक खाते खुलवाने से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. पैसों की जमा-निकासी की रसीदें भी जब्त की गई हैं. पुलिस जांच में अब तक 72 ऐसे संदिग्ध बैंक खातों का पता चला है, जिनका इस्तेमाल ठगी का पैसा घुमाने में होता था. इन खातों से देश के कई राज्यों में दर्ज करीब 86 साइबर ठगी की शिकायतें सीधे तौर पर जुड़ी पाई गई हैं.
देश के कई राज्यों तक फैला था इस गिरोह का जाल
कानपुर पुलिस की शुरुआती जांच में इस गिरोह के तार देशव्यापी पाए गए हैं. इन संदिग्ध खातों का कनेक्शन दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से मिला है. इसके अलावा बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से भी शिकायतें दर्ज हुई हैं. पुलिस अब फॉरेंसिक टीम की मदद से यह आंकड़ा जुटा रही है कि 5600 करोड़ रुपये के कुल लेनदेन में से असली ठगी का पैसा कितना था और इसे किन-किन शेल कंपनियों में भेजा गया.
व्हाट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्ड से खुलेंगे गिरोह के नए राज
आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोनों में पुलिस को संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सऐप चैट का बड़ा डेटा मिला है. इन सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेज दिया गया है. पुलिस की साइबर सेल यह पता लगा रही है कि फर्जी कंपनियों को रजिस्टर कराने में किन बैंक अधिकारियों या सीए की मदद ली गई थी. अधिकारियों का साफ कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े चेहरे जल्द ही गिरफ्तार किए जाएंगे.
डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर फोन आए तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत
इस बड़े भंडाफोड़ के बाद कानपुर पुलिस ने आम जनता को सतर्क रहने की हिदायत दी है. अगर कोई अनजान व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल करके खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या क्राइम ब्रांच का अफसर बताए तो बिल्कुल न डरें. किसी भी फर्जी लुभावने निवेश या डिजिटल अरेस्ट के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें. साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करवाएं या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें.
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख कानपुर पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट, दर्ज प्राथमिकी और साइबर क्राइम जांच रिपोर्ट पर आधारित एक निष्पक्ष समाचार विवरणी है. इसका उद्देश्य पाठकों को वित्तीय अपराधों के प्रति जागरूक करना और प्रामाणिक सूचना पहुंचाना है.
