iran uae meeting brics delhi: इस खबर में जानिए ब्रिक्स 2026 के दौरान दिल्ली में ईरान के राष्ट्रपति और UAE के क्राउन प्रिंस के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात. समझिए कैसे भारत की संतुलित विदेश नीति के चलते मिडिल ईस्ट के दो बड़े विरोधी देशों ने दुश्मनी भुलाकर हाथ मिलाया.
iran uae meeting brics delhi: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत की सरजमीं से एक बहुत बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है. नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के दौरान दो बड़े विरोधी देश ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक मंच पर साथ दिखे. कतर और पाकिस्तान जैसे कई देश जो मिडिल ईस्ट में शांतिदूत बनने की कोशिश में नाकाम रहे, वहीं भारत ने अपनी जमीन पर यह चमत्कार कर दिखाया. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद ने न केवल गर्मजोशी से मुलाकात की, बल्कि अपने विवादों को सुलझाने के लिए लंबी बातचीत भी की.
मिसाइल हमलों और भारी तनाव के बीच खुली कूटनीति की राह
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्ते पिछले कुछ महीनों से बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे थे. क्षेत्र में जारी टकराव के दौरान ईरान की ओर से UAE के इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की खबरें आई थीं. UAE ने इन हमलों का विरोध करते हुए इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया था और ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी. इतने कड़वे माहौल और बारूदी गंध के बावजूद नई दिल्ली में दोनों शीर्ष नेताओं का आमने-सामने बैठना यह साबित करता है कि पर्दे के पीछे भारत की शांतिप्रिय कूटनीति रंग ला रही थी.
ईरानी दूतावास ने की मुलाकात की पुष्टि, शांति के लिए बताया बड़ा कदम
नई दिल्ली में हुई इस बैठक पर पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों की नजरें टिकी हुई थीं. भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी इस उच्चस्तरीय मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि की है. दूतावास ने कहा कि यह वार्ता क्षेत्रीय स्थिरता और शांति स्थापित करने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी. जब पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल मंडरा रहे हों, तब दिल्ली के मंच पर दो कट्टर प्रतिद्वंद्वियों का एक साथ बैठना बहुत बड़ा संदेश देता है. इससे साफ हो गया है कि दोनों देश टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए मसले हल करना चाहते हैं.
ब्रिक्स के मंच से ईरान का अमेरिका पर निशाना और फिलिस्तीन का समर्थन
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ब्रिक्स सम्मेलन के मंच का इस्तेमाल पश्चिमी देशों और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए भी किया. उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से एक सुर में एकजुट होकर अमेरिकी प्रतिबंधों का मुकाबला करने का आह्वान किया. इसके साथ ही उन्होंने परमाणु ठिकानों और आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की. राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन करना और उनका साथ देना ब्रिक्स के सभी सदस्य राष्ट्रों का नैतिक कर्तव्य है.
‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ के जरिए दुनिया को शांति का संदेश
सम्मेलन के समापन पर सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ को मंजूरी दी. इस साझा घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता जताई गई. डिक्लेरेशन में सभी पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने और संयम बरतने की अपील की गई. इसमें साफ कहा गया कि किसी भी देश की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. ब्रिक्स नेताओं ने एक आवाज में दुनिया को संदेश दिया कि टिकाऊ शांति और सुरक्षा बंदूक के बल पर नहीं, बल्कि केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है.
वैश्विक मंच पर भारत की निष्पक्ष विदेश नीति का बढ़ा दबदबा
नई दिल्ली में हुआ यह ऐतिहासिक घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति की एक बहुत बड़ी जीत है. आज के दौर में भारत के संबंध पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख देशों के साथ बेहद मजबूत और भरोसेमंद हैं. यही वजह है कि जब दो विरोधी देश किसी अन्य मंच पर जाने से हिचकिचाते हैं, तो वे भारत की मेजबानी में एक साथ बैठने में सहज महसूस करते हैं. दिल्ली में जमी यह बर्फ पिघलने से मिडिल ईस्ट में शांति का नया रास्ता खुलेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रभाव और अधिक मजबूत होगा.
