uk breaking apart independence news: इस खबर में जानिए यूनाइटेड किंगडम के टूटने और आजादी की मांग को लेकर स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के एकजुट होने की पूरी कहानी। समझिए कार्डिफ की ऐतिहासिक बैठक, डोनाल्ड ट्रंप के बयान और गुड फ्राइडे समझौते का पूरा गणित.

uk breaking apart independence news: ग्रेट ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है. स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के राजनीतिक दल अब अपने अधिकारों के लिए खुलकर सामने आ रहे हैं. इन तीनों क्षेत्रों के शीर्ष नेता वेल्स की राजधानी कार्डिफ में एक ऐतिहासिक बैठक करने वाले हैं. इस बैठक में आयरिश रिपब्लिकन पार्टी ‘सिन फेन’ की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड भी शामिल होंगी. बैठक का मुख्य मकसद एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करना है, जिसमें आत्मनिर्णय और लोकतांत्रिक तरीके से अपना भविष्य तय करने की बात कही जाएगी.
कार्डिफ में नेताओं का महाजुटान: आत्मनिर्णय और सहयोग पर बनेगी सहमति
इस अहम बैठक में स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी और वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर रून एपी इओरवर्थ एक साथ नजर आएंगे. तीनों क्षेत्रों में इस समय ऐसी क्षेत्रीय पार्टियों की सरकार है, जो ब्रिटेन की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग कर रही हैं. बैठक में केवल आजादी या ब्रिटेन से अलग होने का मुद्दा ही शामिल नहीं है. बल्कि अर्थव्यवस्था, ऊर्जा नीतियों, यूरोपीय संघ के साथ संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी.
स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह की तेज मांग: जॉन स्विनी का बड़ा दावा
स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी काफी समय से ब्रिटेन से आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग उठा रहे हैं. स्विनी का कहना है कि यह इतिहास में पहली बार हुआ है जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड तीनों जगहों पर ऐसे नेता सत्ता में हैं जो संवैधानिक बदलाव का समर्थन करते हैं. उनका मानना है कि वर्तमान राजनीतिक हालात बताते हैं कि ब्रिटेन की पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था पर बहुत भारी दबाव है. हालांकि ब्रिटिश सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल अगले आम चुनाव से पहले कोई नया जनमत संग्रह नहीं कराया जाएगा.
उत्तरी आयरलैंड के एकीकरण का मुद्दा गर्म: गुड फ्राइडे समझौते का जिक्र
उत्तरी आयरलैंड में ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड के साथ जाने की मांग हमेशा से ही संवेदनशील रही है. 1998 का ‘गुड फ्राइडे समझौता’ स्पष्ट रूप से कहता है कि अगर वहां की ज्यादातर जनता चाहे, तो जनमत संग्रह के जरिए फैसला हो सकता है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने इस आग में घी डालने का काम किया है. अपने डब्लिन दौरे पर ट्रंप ने कहा था कि वे आयरलैंड को एक होते देखना पसंद करेंगे. ट्रंप के इस बयान के बाद आयरलैंड के एकीकरण की मांग ने फिर से जोर पकड़ लिया है.
वेल्स की क्राउन एस्टेट और वित्तीय अधिकारों पर सख्त मांग
वेल्स की सत्तारूढ़ पार्टी ‘प्लेड कम्री’ भी लंदन सरकार से अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता मांग रही है. पार्टी की नजर वेल्स के तटीय इलाकों में चलने वाले ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स और क्राउन एस्टेट से मिलने वाले भारी राजस्व पर है. वेल्स के नेता चाहते हैं कि स्थानीय पुलिस व्यवस्था, रेलवे फंडिंग और टैक्स कलेक्शन में राज्य को ज्यादा अधिकार मिले. वेल्स की मांग है कि ब्रिटेन की केंद्रीय आर्थिक प्रणाली में तुरंत सुधार किया जाए ताकि उनके संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके.
संवैधानिक ढांचा कमजोर: आने वाले दिनों में और गहराएगा संकट
हालांकि इस बैठक से तुरंत ब्रिटेन के टूट जाने या नया देश बनने की कोई तय समयसीमा तय नहीं हुई है. ब्रिटिश सरकार भी अलगाव के किसी भी कदम का कड़ा विरोध कर रही है. लेकिन स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड का एक साथ एक मंच पर आना यह साफ संकेत देता है कि यूनाइटेड किंगडम की नींव पर दबाव बढ़ चुका है. आने वाले समय में लंदन की केंद्रीय सत्ता और इन तीनों स्वायत्त क्षेत्रों के बीच अधिकारों की यह जंग और ज्यादा तीखी होने वाली है.
