brics summit 2026 delhi declaration: इस खबर में जानिए नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के 5 सबसे बड़े फैसलों के बारे में। समझिए आतंकवाद, ग्लोबल ट्रेड, अंतरिक्ष सहयोग और यूएनएससी सुधार के मोर्चे पर भारत को कौन-सी बड़ी कूटनीतिक सफलताएं हासिल हुईं।

brics summit 2026 delhi declaration: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में दुनिया के दो तिहाई देशों ने एक साथ मिलकर नया इतिहास रच दिया. इस महासम्मेलन में दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 सदस्य देश, 12 सहयोगी देश और संयुक्त राष्ट्र जैसी 5 अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं एक मंच पर एकत्रित हुईं. वैश्विक तनाव और युद्ध के माहौल के बीच भारत ने शांति का संदेश देते हुए दुनिया को जोड़ने का काम किया. तीन दिनों के लंबे विचार-विमर्श के बाद ‘दिल्ली घोषणा पत्र’ जारी किया गया, जिसमें भारत की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति का लोहा पूरी दुनिया ने माना.
आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: पहलगाम हमले और टेरर फंडिंग पर लगी लगाम
शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा फैसला आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर रहा. भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत यह रही कि पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए टेरर फंडिंग पर पूरी तरह रोक लगाने पर सहमति बनी. सबसे खास बात यह रही कि चीन ने भी पाकिस्तान का परोक्ष रूप से नाम लिए बिना इस आतंकवादी दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर किए. यह भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि चीन ने पहली बार इस तरह के आतंकवाद विरोधी प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है.
सैन्य टकराव और एकतरफा टैरिफ पर जताई गई गहरी चिंता
दुनिया भर में जारी युद्ध और तनाव को देखते हुए सम्मेलन में एकतरफा सैन्य कार्रवाई और युद्ध के रास्तों को खारिज किया गया. ब्रिक्स देशों ने यह तय किया कि व्यापारिक जहाजों के रास्तों में आने वाली बाधाओं को केवल शांतिपूर्ण बातचीत से सुलझाया जाएगा. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिना सोचे-समझे लगाए जाने वाले एकतरफा टैरिफ को लेकर भी गंभीर चिंता जाहिर की गई. भारत ने साफ किया कि व्यापार में निष्पक्षता और सभी देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
ग्लोबल वैल्यू चेन 2026-2030: बाजारों को खोलने और व्यापार बढ़ाने पर सहमति
आर्थिक मोर्चे पर भारत ने एक मजबूत जमीन तैयार की है. सम्मेलन में ‘ग्लोबल वैल्यू चेन 2026-2030’ समझौते पर मुहर लगी, जिसके तहत सभी सदस्य देश एक-दूसरे के लिए अपने बाजार खोलेंगे. चीन भी व्यापार, डेटा, स्किल और अपनी करेंसी को लेकर अधिक लचीला रुख अपनाने के लिए तैयार हो गया है. इससे भारतीय व्यापारियों और निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे. इस कदम से आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा.
अंतरिक्ष और पर्यावरण की सुरक्षा: रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट समझौते को मिली मंजूरी
पर्यावरण बदलाव और मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम उठाया है. सम्मेलन में ‘ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन’ सहयोग समझौते को अंतिम मंजूरी दी गई. इस तकनीक की मदद से सभी सदस्य देश प्राकृतिक आपदाओं, पर्यावरण में हो रहे बदलावों और कृषि से जुड़े डेटा को एक-दूसरे के साथ आसानी से साझा कर सकेंगे. भारत की अंतरिक्ष एजेंसी और वैज्ञानिक क्षमता को इस समझौते से वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी.
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग: ग्लोबल साउथ को मिलेगा बड़ा अधिकार
भारत काफी समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बड़े बदलावों की मांग करता आ रहा है. इस दिल्ली शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों ने एक सुर में यूएनएससी की पुरानी संरचना में सुधार की मांग उठाई. चीन, जो अक्सर भारत के प्रस्तावों का विरोध करता था, उसने भी इस बार सुरक्षा परिषद में सुधार और ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की भागीदारी बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई. यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत और नेतृत्व क्षमता का सबसे बड़ा सबूत है.
