suvendu adhikari chinmoy krishna das: इस खबर में जानिए बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय दास की भावुक तस्वीरों पर शुभेंदु अधिकारी का बयान। समझिए कैसे उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान और अपने परिवार के बंटवारे के दर्द का जिक्र कर विरोधियों पर निशाना साधा.

suvendu adhikari chinmoy krishna das: पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास का मुद्दा एक बार फिर तेजी से गर्म हो गया है. पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत को लेकर बड़ा बयान दिया है. शनिवार को राजारहाट गोपालपुर में एक गणेश पूजा के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अपनी मां के अंतिम संस्कार के दौरान चिन्मय कृष्ण की भावुक तस्वीरों ने पूरी दुनिया के सनातनियों को हिलाकर रख दिया है. इस दौरान उन्होंने बंटवारे के दर्द को याद करते हुए राज्य की मौजूदा और पूर्व सरकारों पर जमकर निशाना साधा.
पांच घंटे की पैरोल और मां के अंतिम संस्कार का दर्द
बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को हाल ही में अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ 5 घंटे की पैरोल मिली थी. उनकी मां का पिछले हफ्ते निधन हो गया था. अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे संत चिन्मय दास जब अपनी मां के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोए, तो वह दृश्य बहुत ही भावुक कर देने वाला था. सोशल मीडिया पर वायरल हुई इन तस्वीरों का जिक्र करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि चिन्मय दास के आंसुओं ने हर सनातनी का दिल दुखाया है. चिन्मय कृष्ण नवंबर 2024 से बांग्लादेश में पुलिस हिरासत में हैं और उन पर वहां देशद्रोही मामलों के तहत मुकदमे चल रहे हैं.
अगर भारत में विलय न होता तो हमारी हालत भी वैसी होती
अपने संबोधन के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद के ऐतिहासिक योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद ने संघर्ष करके बंगाल का भारत में विलय न कराया होता, तो आज हमारी हालत भी बांग्लादेश के चिन्मय दास जैसी होती. उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी और टीएमसी की सरकारों ने जानबूझकर इन दोनों महान नेताओं के संघर्ष को इतिहास के पन्नों से मिटाने की कोशिश की है. वे बंगाली हिंदुओं के लिए अलग मातृभूमि बनाने के ऐतिहासिक आंदोलन को लोगों से छुपाते रहे हैं.
बंटवारे के दौरान शुभेंदु अधिकारी के परिवार ने भी झेला था दर्द
शुभेंदु अधिकारी ने मंच से अपने परिवार से जुड़ा एक बेहद भावुक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने अपनी मां गायत्री देवी के दर्दनाक अनुभवों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार मूल रूप से उसी इलाके का रहने वाला था जो आज बांग्लादेश का हिस्सा है. बंटवारे के समय हिंदू होने के कारण उनकी मां को अपने पिता के साथ जान बचाकर भारत भागना पड़ा था. उन्हें सब कुछ पीछे छोड़कर सिर्फ एक जोड़ी कपड़ों में वहां से निकलना पड़ा था. अधिकारी ने कहा कि बंटवारे और अत्याचार की टीस उनके अपने परिवार के जीवन में भी गहराई से बसी हुई है.
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का उठाया मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी लगातार बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते रहे हैं. उन्होंने पिछले साल मैमनसिंह में हुए दीपू दास की हत्या के मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने याद दिलाया कि उस समय भी उन्होंने तब तक लगातार विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था, जब तक कि ढाका सरकार दोषियों पर कार्रवाई और हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ न कर दे. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाना हर सनातनी का नैतिक धर्म है.
लेफ्ट और टीएमसी पर बंगाल की परंपरा मिटाने का लगाया आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने 34 सालों के वामपंथी शासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्ट सरकार ने बंगाल के लोगों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से काटने का काम किया. वामपंथियों ने लोगों को पंचांग, शास्त्र, पंडित, आरती और पुष्पांजलि से दूर करने की कोशिश की. यहां तक कि दुर्गा पूजा और महालया को भी वैचारिक विरोध के दायरे में लाया गया. इसके बाद उन्होंने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि टीएमसी ने अपने शासनकाल में बंगाल का ‘जमातीकरण’ करने की कोशिश की है, लेकिन वे बंगाल की पुरानी परंपरा और विरासत को वापस लाकर रहेंगे.
