baghpat double murder case mahant nareshnath: बागपत के गणेश मंदिर में दो दोस्तों की हत्या कर लाशें दफनाने वाले 25 हजार के इनामी महंत नरेशनाथ को पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है. प्रेमिका के भाई द्वारा ब्लैकमेल करने पर उसने इस वारदात को अंजाम दिया था.

baghpat double murder case mahant nareshnath: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी महंत बाबा नरेशनाथ को गिरफ्तार कर लिया है. वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी फरार चल रहा था और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था. बागपत पुलिस की टीम ने सर्विलांस की मदद से आरोपी को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से धर दबोचा. पुलिस की पूछताछ में आरोपी महंत ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. उसने बताया कि किस तरह दो लोगों की हत्या कर शवों को मंदिर में ही गाड़ दिया गया था.
मंदिर के नीचे दफना दी थी दोनों दोस्तों की लाशें
यह पूरा मामला बागपत के चांदीनगर थाना क्षेत्र के लहचौड़ा गांव में स्थित गणेश मंदिर का है. 25 जुलाई को सिंगौली तगा गांव के रहने वाले दो दोस्त अंकित और इसरार अचानक गायब हो गए थे. परिजनों की शिकायत पर जब पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की, तो शक की सुई मंदिर के महंत पर गई. इसके बाद 13 अगस्त को पुलिस ने मंदिर परिसर में जमीन की खुदाई करवाई. खुदाई के दौरान जमीन के नीचे से दोनों गायब दोस्तों के शव बरामद हुए. आरोपी ने दोनों को मारकर गड्ढे में दफना दिया था और ऊपर से पक्की टाइल्स लगवा दी थीं.
अफेयर और ब्लैकमेलिंग बनी हत्या की मुख्य वजह
पुलिस की पूछताछ में महंत नरेशनाथ ने हत्या के पीछे की खौफनाक साजिश का खुलासा किया. आरोपी ने बताया कि उसके अंकित की बहन के साथ प्रेम संबंध थे. अंकित के हाथ उन दोनों की कुछ तस्वीरें लग गई थीं. इन्हीं तस्वीरों के जरिए अंकित महंत पर लगातार पैसों का दबाव बना रहा था और ब्लैकमेल कर रहा था. समाज में बदनामी के डर से महंत ने अंकित को रास्ते से हटाने का मन बना लिया. जिस दिन वारदात हुई, उस दिन अंकित के साथ उसका दोस्त इसरार भी मंदिर पहुंच गया था.
चाय में नींद की गोलियां मिलाकर दी खौफनाक मौत
योजना के मुताबिक महंत ने अंकित और इसरार दोनों को चाय में नींद की गोलियां मिलाकर पिला दीं. जब चाय पीने के बाद दोनों बेहोश हो गए, तब महंत ने बड़ी बेरहमी से उन दोनों की हत्या कर दी. चूंकि इसरार भी अंकित के साथ मंदिर आया था, इसलिए अपनी पहचान छिपाने और राज खुलने के डर से महंत ने उसे भी मार डाला. इसके बाद उसने मंदिर परिसर में ही गहरा गड्ढा खोदा और दोनों की लाशों को उसमें दबा दिया. मामले पर किसी को शक न हो, इसलिए उसने ऊपर से नई टाइल्स बिछाकर फर्श पक्का करवा दिया.
गंगा स्नान से लेकर नेपाल और कोलकाता तक फरारी
दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद महंत मंदिर छोड़कर फरार हो गया. वह सबसे पहले हरिद्वार पहुंचा और वहां गंगा में डुबकी लगाई. इसके बाद वह पुलिस से बचने के लिए सीधा नेपाल भाग गया. हालांकि, उन दिनों नेपाल में भारी बाढ़ आ गई, जिसकी वजह से उसे वहां से भागना पड़ा. नेपाल से निकलकर वह पश्चिम बंगाल के कोलकाता (विधाननगर) पहुंच गया. वहां उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए भिखारी का रूप धारण कर लिया और एक मंदिर के बाहर मांगने लगा.
पुलिस सर्विलांस से पकड़ा गया इनामी कातिल
बागपत पुलिस लगातार आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर रही थी. सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को पता चला कि इनामी महंत कोलकाता में छिपा हुआ है. पुलिस की विशेष टीम ने तुरंत कोलकाता पहुँचकर मंदिर के बाहर भिखारी बने बैठे नरेशनाथ को दबोच लिया. कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस आरोपी को वापस बागपत ले आई. अदालत में पेश करने के बाद कोर्ट ने कातिल महंत को जेल भेज दिया है.
