sp congress alliance up assembly election: उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन का ऐलान होने के बावजूद सीट बंटवारे पर पेंच फंसा हुआ है. कांग्रेस जल्द से जल्द फैसले की मांग कर रही है, जबकि सपा जीत की संभावना देखकर सीटें तय करने के पक्ष में है.

sp congress alliance up assembly election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातें तो जोर-शोर से हो रही हैं. अखिलेश यादव और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कई बार साथ मिलकर चुनाव लड़ने का दावा कर चुका है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों ही दल अंदरखाने राज्य की सभी 403 सीटों पर अपनी-अपनी तैयारी में जुटे हैं. मायावती ने पहले ही किसी से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया है, जबकि चंद्रशेखर आजाद और ओवैसी जैसे नेता अपने विकल्प तलाश रहे हैं. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सपा और कांग्रेस के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है या सीट बंटवारे को लेकर कोई बड़ा पेंच फंसा हुआ है.
सीटों के फॉर्मूले पर फंसा पेंच
भले ही दोनों दल साथ आने का दावा कर रहे हों, लेकिन अभी तक सीटों के बंटवारे का कोई तय फॉर्मूला सामने नहीं आया है. कांग्रेस का एक गुट भले ही दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहता हो, लेकिन राहुल गांधी अखिलेश यादव के साथ जाने का मन बना चुके हैं. हालांकि कांग्रेस इस बार अपनी शर्तों पर चुनाव लड़ने की बात कह रही है. कांग्रेस का मानना है कि वह अपनी सीटें खुद तय करेगी, जबकि सपा का रुख साफ है कि अगर बात नहीं बनी, तो वह अकेले सभी 403 सीटों पर किस्मत आजमाएगी.
फैसले में देरी से कांग्रेस की चिंता
कांग्रेस पार्टी चाहती है कि सीट शेयरिंग का फैसला जल्द से जल्द हो जाए. पार्टी के नेताओं का मानना है कि अगर सीटों का चयन समय पर हो जाएगा, तो उम्मीदवार अपनी तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे. वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी सीट बंटवारे में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है. सपा पहले अपनी तैयारियों को मजबूत करना चाहती है, जबकि कांग्रेस को डर है कि देरी होने पर उसकी मोलभाव करने की ताकत कम हो जाएगी और उसे सपा की शर्तों पर राजी होना पड़ेगा.
इमरान मसूद की जल्दबाजी और सपा का रुख
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने साफ कहा है कि अक्टूबर तक हर हाल में सीटों की संख्या और नामों का फैसला हो जाना चाहिए. उनका कहना है कि अगर फैसले में देरी हुई तो पार्टी को जमीनी स्तर पर नुकसान उठाना पड़ेगा. कांग्रेस का दावा है कि उसने डेढ़ सौ से ज्यादा सीटों की एक सूची सपा को सौंप दी है. हालांकि अखिलेश यादव का कहना है कि सीटों की संख्या से ज्यादा जीत की संभावना मायने रखती है. सपा के मुताबिक जो पार्टी जहाँ जीतने की स्थिति में होगी, वहाँ वही चुनाव लड़ेगी.
दोनों दलों की अपनी-अपनी कमजोरियां
सपा और कांग्रेस भले ही सभी सीटों पर तैयारी का दावा कर रही हों, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों अकेले दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं. पश्चिमी यूपी में सपा का जनाधार थोड़ा कमजोर माना जाता है, तो वहीं पूरे प्रदेश में कांग्रेस का संगठन ढांचा उतना मजबूत नहीं है. दोनों दल अपनी-अपनी कमजोरियों से वाकिफ हैं और जानते हैं कि अलग-अलग लड़कर जीत हासिल करना आसान नहीं होगा. इसी वजह से दोनों गठबंधन की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत रखना चाहते हैं.
अनौपचारिक चर्चा और औपचारिक फैसले का इंतजार
अखिलेश यादव सीट बंटवारे की बात को चुनाव की तारीखों के करीब ले जाना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस के बड़े नेता इसे जल्द से जल्द निपटाना चाहते हैं. अभी तक दोनों पार्टियों के बीच सिर्फ अनौपचारिक बातें ही हुई हैं और कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दल अपनी शर्तों से समझौता करते हैं या यूपी की राजनीति में कोई नया मोड़ देखने को मिलता है.
