AI के इस्तेमाल को लेकर CJI सूर्यकान्त ने कहा कि कोर्ट में कानूनी रिसर्च और ट्रांसलेशन को आसान बना सकता है, लेकिन AI न्यायिक विवेक और इंसानी फैसले की जगह नहीं ले सकता.
CJI सूर्यकांत ने AI को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यायिक तर्क क्षमता को बेहतर बना सकता है, लेकिन न्यायिक विवेक की जगह नहीं ले सकता. AI न्याय व्यवस्था को तेज और ज्यादा बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी इंसान की ही रहेगी. उन्होंने बताया कि कोर्ट में AI का इस्तेमाल कानूनी रिसर्च, फैसलों के ट्रांसलेशन और नागरिकों को केस से जुड़ी जानकारी देने जैसे कामों में किया जा रहा है.
न्यायपालिका में AI के इस्तेमाल पर बोले CJI
CJI ने इस दौरान कहा कि AI का मकसद बार-बार होने वाले कामों को कम करना है, न कि न्यायिक फैसलों को तय करना. उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी को अपनाने के साथ उसकी जवाबदेही तय करना भी जरूरी है. इसके लिए AI के इस्तेमाल और उसकी निगरानी के लिए एक स्थायी शीर्ष संस्था बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. जर्मनी के कार्ल्सरूहे स्थित फेडरल कोर्ट ऑफ जस्टिस के पीठासीन जज उलरिख हरमन के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका में AI के इस्तेमाल और उसकी सीमाओं पर बात की. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी न्यायिक प्रक्रिया को आसान बना सकती है, लेकिन इंसानी सोच, कानून की समझ और न्यायिक विवेक का विकल्प नहीं बन सकती.
कोर्ट में AI का इस्तेमाल, लेकिन फैसला इंसान का
इस दौरान CJI सूर्यकान्त ने कहा कि AI न्यायिक तर्क क्षमता को बेहतर बना सकता है लेकिन वह न्यायिक विवेक की जगह नहीं ले सकता. सुप्रीम कोर्ट की AI समिति के ड्राफ्ट नियमों में टाइम-टेबल तैयार करने, कार्यवाही को लिखित रूप देने और ट्रांसलेशन जैसे प्रशासनिक कामों में AI के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है. हालांकि, गवाहों की विश्वसनीयता, फरार होने के जोखिम, दोबारा अपराध करने की आशंका या जमानत के लिए पात्रता के आकलन में AI के इस्तेमाल पर रोक है. AI के इस्तेमाल और उसकी जवाबदेही की निगरानी के लिए एक स्थायी शीर्ष संस्था के गठन का प्रस्ताव भी दिया गया है.
