Gold Price Drop: सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 26% तक गिर चुकी हैं. जानिए त्योहारी सीजन और दिवाली से पहले कमोडिटी एक्सपर्ट्स की सोने की चाल पर क्या राय है.
Gold Price Drop: भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. सोना अपने रिकॉर्ड ऑल टाइम हाई से करीब 26 प्रतिशत तक नीचे आ चुका है. इसके दाम 50,000 रुपये तक सस्ते हो चुके हैं. दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल के दाम चढ़े हुए हैं. महंगाई बढ़ने की वजह से अमेरिकी सेंट्रल बैंक सख्त नीतियां अपना रहा है. इन तमाम वजहों से सोने की चमक फीकी पड़ी है और कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है.
ऑल टाइम हाई से काफी नीचे आ चुका है सोना
इसी साल 28 जनवरी 2026 को सोने की वैश्विक कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं. उस दौरान इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड उछलकर 5,419 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक चला गया था. भारत में भी इसका असर दिखा था और दाम 1,90,000 रुपये के पार निकल गए थे. लेकिन अब अक्टूबर महीने में हालात बदल चुके हैं. सोने की कीमत गिरकर करीब 4,038 डॉलर प्रति औंस यानी भारत में लगभग 1,41,630 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गई है.
क्या और गिरेगा सोना या आएगी तेजी?
सोने में लगातार आ रही इस बड़ी गिरावट के बाद हर निवेशक के मन में यही सवाल है कि क्या यह दौर आगे भी जारी रहेगा. क्या आने वाले त्योहारी सीजन या दिवाली से पहले गोल्ड में कोई राहत देखने को मिलेगी? कमोडिटी मार्केट के एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट से सोने का मुख्य और व्यापक तेजी का रुख खत्म नहीं हुआ है. वैश्विक अनिश्चितताओं और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही सोने की खरीद से इसे नीचे के स्तरों पर मजबूत सपोर्ट मिलना तय माना जा रहा है.
1,30,000 रुपये तक आ सकता है भाव
कमोडिटी मार्केट के जाने-माने एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि शॉर्ट टर्म यानी निकट भविष्य में सोने की कीमतों में तुरंत उछाल आने की संभावना कम है. उनका मानना है कि सोने में गिरावट का यह दौर अभी थोड़ा और चल सकता है. इंटरनेशनल मार्केट में भाव गिरकर 3,800 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकते हैं. ऐसे में भारतीय बाजारों में 1,30,000 रुपये का स्तर खरीदारी के लिए एक बहुत मजबूत सपोर्ट साबित हो सकता है.
ये बड़े कारण तय कर रहे हैं सोने की चाल
विशेषज्ञों के मुताबिक डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और रूस द्वारा लगातार की जा रही सोने की बिकवाली इसके लिए बड़े नेगेटिव ट्रिगर बने हैं. इसके अलावा, आगामी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और उसकी कमेंट्री भी सोने की अगली चाल तय करेगी. बाजार में डिमांड की कमजोरी भी कीमतों पर असर डाल रही है. हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का आकर्षण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
निवेशकों के लिए आगे क्या है रणनीति?
बोनान्ज़ा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव का भी यही कहना है कि मौजूदा गिरावट का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सोने का लंबा बुल रन खत्म हो गया है. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और दुनिया भर के जोखिम भरे हालात सोने को बड़ा सहारा देते रहेंगे. हालांकि, त्योहारों के सीजन में खरीदारी करने से पहले निवेशकों को बाजार के रुख और एक्सपर्ट्स की सलाह पर नजर रखनी चाहिए ताकि वे सही समय पर सही फैसला ले सकें.