नोएडा ट्विन टावर मामला: 2022 में नोएडा ट्विन टावर लोगों के बीच काफी चर्चित मुद्दा था. हाल ही में यह मामला फिर से सरगर्मी पकड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. दरअसल, इसको लेकर सरकार ने दोषियों की रिपोर्ट बनाने के लिए दी थी. वह रिपोर्ट अब सरकार के हवाले कर दी गई है. उसमें कई सारे लोगों को एसीईओ ने दोषी करार किया है.
क्या था पूरा मामला
दरअसल, सरकार द्वारा 2021 में 21 अगस्त के दिन इस टावर को गिराने के लिए आदेश दिया गया था , जिसके बाद 2022 में 28 अगस्त को इस टावर को गिरा दिया गया था. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोएडा अथॉरिटी पर गंभीर आरोपों को लगाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने बोला था कि अथॉरिटी के चेहरे से ही नहीं, बल्कि मुंह, आंख, नाक सभी से भ्रष्टाचार टपकता हुआ दिखाई देता है.
रिपोर्ट में 26 अधिकारी आरोपी
हालांकि, इसके बाद उत्तर प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय जांच समिति का निर्माण किया गया था. रिपोर्ट के आधार पर 26 अधिकारियों पर आरोप डाला गया था. उनसें से 2 की मौत और 2 रिटायर्ड भी हो गए थे. साथ ही 4 अधिकारियों का निलंबन भी कर दिया गया है.
जानकारी के अनुसार ट्विन टावर को ध्वस्त कर देने के बाद सरकार द्वारा 11 अधिकारियों की जांच करने के लिए एसीईओ प्रवीण मिश्रा को जांच करने के लिए आदेश दिया गया था. हालांकि, उनका 2022 में ट्रांसफर हो चुका था, जिसके बाद नोएडा की तरफ से सरकार को कई बार पत्र लिखा गया था.
सरकार को सौंपी रिपोर्ट में ये थे दोषी
इसके बाद इसकी जांच की जिम्मेदारी 2023 में ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव की दी गई थी. वहीं, जांच रिपोर्ट में प्लानिंग असिस्टेंट अनीता, वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन रितुराज व्यास, सहयुक्त नगर नियोजक विमला सिंह, तत्कालीन प्रबंधक नियोजन मुकेश गोयल, रिटायर्ड नगर नियोजक एके मिश्रा, रिटायर्ड विधि सलाहकार राजेश कुमार, मार्च 2020 को रिटायर्ड विधि अधिकारी ज्ञानचंद, रिटायर्ड प्लानिंग असिस्टेंट सहायक वास्तुविद टीएन पटेल, रिटायर्ड परियोजना अभियंता एमसी त्यागी, रिटायर्ड सहायक वास्तुविद प्रवीन श्रीवास्तव, परियोजना अभियंता बाबूराम को दोषी पाया गया है. साथ ही जांच रिपोर्ट के निकलते ही विजिलेंस की टीम भी नोए़डा अथॉरिटी के दफ्तर में पहुंच कर पुराने अधिकारियों CEO मोहिंदर सिंह, SK द्विवेदी, ACEO आरपी अरोड़ा और OSD यशपाल सिंह से भी पूछताछ शुरू की.
क्यों किया गया था ध्वस्त
दरअसल, इसको गिराने के एक ही नहीं बल्कि कई कारण थे. दरअसल, दो टावरों के बीच में कम से कम 16 मीटर की दूरी अनिवार्य मानी जाती है. फिर भी यह दूरी 9 मीटर की थी. इसके बाद 30 से 32 मंजिल टावर को 40 मंजिल बनाने की योजना बनाई जा रही थी. जो कि नियमों के खिलाफ होता है. इसके अलावा अन्य कारणों को देखते हुए और अवैध तरीके से बनाए जाने के कारण इनको 3,700 किलों विस्फोटक का प्रयोग करके 9 सैंकड के अंदर गिरा दिया गया था.
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