s jaishankar on iris dena sunk: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2026 में स्पष्ट किया कि भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी जहाज को कोच्चि आने की अनुमति दी थी. उन्होंने 4 मार्च को हुए अमेरिकी हमले और हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य सक्रियता पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा.
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s jaishankar on iris dena sunk: भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने Raisina Dialogue 2026 के दौरान ईरानी युद्धपोत पर हुए अमेरिकी हमले को लेकर भारत का पक्ष साफ किया. उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करता है. खास तौर पर United Nations Convention on the Law of the Sea यानी UNCLOS का समर्थन करता है. जयशंकर ने बताया कि ईरान के एक जहाज ने तकनीकी खराबी के कारण भारत के बंदरगाह में आने की अनुमति मांगी थी. मानवीय आधार पर भारत ने उसे अनुमति दी. उन्होंने कहा कि जहाज गलत समय पर गलत जगह फंस गया.
जयशंकर ने बताया कि ईरान की तरफ से भारत को संदेश मिला था. उसमें कहा गया था कि एक जहाज भारत के समुद्री क्षेत्र के पास है और उसमें तकनीकी समस्या आ गई है. इसलिए वह किसी बंदरगाह में आना चाहता है. भारत ने स्थिति को देखते हुए 1 मार्च को उसे अनुमति दे दी. कुछ दिन बाद जहाज केरल के Kochi बंदरगाह पर पहुंच गया. उस जहाज पर कई युवा कैडेट भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि जब जहाज भारत आया तब हालात सामान्य थे. लेकिन बाद में हालात अचानक बदल गए और घटनाक्रम दूसरी दिशा में चला गया.
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने इस पूरे मामले को मानवता के नजरिए से देखा. जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया. उन्होंने कहा कि दूसरे जहाजों के साथ भी ऐसी ही स्थिति बनी थी. एक जहाज Hambantota के पास संकट में आ गया था. दुर्भाग्य से उसे बचाया नहीं जा सका. जयशंकर ने कहा कि भारत ने जो फैसला लिया वह सही था. उनके अनुसार कठिन हालात में भी भारत अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है.
इस दौरान उन्होंने हिंद महासागर की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कई बड़ी ताकतें सक्रिय हैं. उदाहरण के तौर पर Diego Garcia पिछले कई दशकों से रणनीतिक रूप से अहम रहा है. इसके अलावा Djibouti में भी विदेशी सैन्य ठिकाने बने हैं. वहीं श्रीलंका के Hambantota बंदरगाह का विकास भी इसी दौर में हुआ. जयशंकर ने कहा कि इन सब परिस्थितियों को समझते हुए भारत अपनी भूमिका निभा रहा है.
दरअसल 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक बड़ा हादसा हुआ. अमेरिका की पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो से हमला कर दिया. इस हमले में जहाज डूब गया. खबरों के मुताबिक इस घटना में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए और 32 लोगों को जिंदा बचाया. उन्हें इलाज के लिए Galle ले जाया गया. वहीं अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस हमले की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन जहाज को डुबोया है.
