cia declassified documents: सीआईए के नए दस्तावेजों के अनुसार, ओसामा बिन लादेन एबटाबाद स्थित अपने ठिकाने को छोड़ने की योजना बना रहा था क्योंकि उसे पनाह देने वाले भाई उस पर दबाव बना रहे थे.

cia declassified documents: दुनिया के सबसे बड़े आतंकी सरगनाओं में शामिल Osama bin Laden को पकड़ने के लिए अमेरिका ने एक बेहद गुप्त और बड़ा ऑपरेशन चलाया था. यह ऑपरेशन पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में किया गया था. इस पूरे मिशन की जिम्मेदारी Central Intelligence Agency यानी सीआईए के पास थी. अधिकारियों को जब उस रहस्यमयी कंपाउंड पर शक हुआ तो जांच तेज कर दी गई. धीरे-धीरे सुराग मिलते गए और शक यकीन में बदल गया कि यही वह जगह है जहां लादेन छिपा हुआ है. इसके बाद ऑपरेशन की तैयारी शुरू हो गई. लादेन को जिंदा या मुर्दा पकड़ना ही इस मिशन का मुख्य लक्ष्य था.
हमले से पहले अमेरिकी एजेंसियों ने पूरी तैयारी की थी. जिस कंपाउंड में लादेन छिपा था, उसी आकार का एक नकली ढांचा बनाया गया. इसमें अंदर की दीवारें भी ऐसी बनाई गई थीं जिन्हें हिलाया जा सकता था. इसका मकसद यह था कि कमांडो टीम हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रह सके. इस मिशन को पूरा हुए अब करीब 15 साल हो चुके हैं. 2 मई 2011 को एबटाबाद में यह कार्रवाई की गई थी. ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही मिनटों के अंदर लादेन को मार गिराया गया था. हाल ही में सीआईए ने इस मिशन से जुड़े कुछ नए दस्तावेज जारी किए हैं. इनमें कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो पहले सार्वजनिक नहीं थे.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन से पहले लादेन अपने ठिकाने को छोड़ने की तैयारी कर रहा था. अगर अमेरिकी कार्रवाई कुछ दिन और टल जाती तो शायद कहानी का अंत अलग होता. सीआईए के रिकॉर्ड के अनुसार लादेन उस कंपाउंड के अंदर रहते हुए भी अल-कायदा के कामकाज को निर्देश दे रहा था. इसी दौरान यह भी पता चला कि जिन दो भाइयों ने उसे सालों तक पनाह दी थी, वे अब इस स्थिति से परेशान हो चुके थे. वे लगातार लादेन पर दबाव बना रहे थे कि वह यह जगह छोड़ दे.
एक दस्तावेज के अनुसार 14 जनवरी 2011 को लादेन ने एक पत्र लिखा था. इसमें उसने उन भाइयों का धन्यवाद किया था जिन्होंने उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई थी. लेकिन उसने यह भी माना कि उसकी मौजूदगी की वजह से इलाके में तनाव बढ़ गया है. बाद में एक और पत्र में उसने स्वीकार किया कि वे दोनों भाई अब उससे अलग होना चाहते हैं और इस व्यवस्था से थक चुके हैं. लादेन ने यह भी माना कि भविष्य में वह किसी दूसरी जगह जाने की योजना बना रहा है.
लादेन तक पहुंचने की कहानी काफी पहले शुरू हो गई थी. 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए हमलों के बाद खुफिया एजेंसियों ने उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी. इसी दौरान एक भरोसेमंद कूरियर का पता चला. कई साल की जांच के बाद अगस्त 2010 में एजेंसियों ने उसे एबटाबाद के उसी कंपाउंड से जोड़ दिया. इसके बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama ने 29 अप्रैल 2011 को ऑपरेशन की मंजूरी दी. रात के समय अमेरिकी हेलीकॉप्टर अफगानिस्तान से उड़े और एबटाबाद पहुंचे. हमले के दौरान एक हेलीकॉप्टर क्रैश भी हुआ, लेकिन मिशन जारी रहा. लादेन को तीसरी मंजिल पर मार गिराया गया. बाद में उसका शव अरब सागर में अमेरिकी युद्धपोत USS Carl Vinson से समुद्र में दफना दिया गया.
