Andes Hantavirus: एंडीज हंतावायरस के बढ़ते मामलों के बीच डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने स्पष्ट किया है कि यह फिलहाल वैश्विक महामारी का रूप नहीं लेगा. हालांकि इसकी मृत्यु दर 40% तक हो सकती है, लेकिन यह कोरोना की तुलना में बहुत धीमी गति से फैलता है, जिससे स्थिति नियंत्रण में है.

Andes Hantavirus: कोरोना महामारी की डरावनी यादें अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई थीं कि अब एंडीज हंतावायरस ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में एक क्रूज शिप पर इस वायरस के कई मामले सामने आए हैं. कुछ लोगों की मौत की खबर के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं. हालांकि WHO की पूर्व वैज्ञानिक और ICMR की पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने साफ कहा है कि फिलहाल यह वायरस नई वैश्विक महामारी बनने की स्थिति में नहीं है. उनके मुताबिक हालात अभी नियंत्रण में हैं और घबराने की जरूरत नहीं है.
डॉ. स्वामीनाथन के अनुसार हंतावायरस आमतौर पर चूहों और दूसरे कुतरने वाले जीवों से इंसानों तक पहुंचता है. लेकिन एंडीज हंतावायरस की खास बात यह है कि यह इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. क्रूज शिप पर हुए संक्रमण में 11 लोग संक्रमित पाए गए हैं. इनमें से 3 लोगों की मौत हो चुकी है. इस वायरस की सबसे बड़ी चिंता इसकी मौत दर को लेकर है. बताया जा रहा है कि इसकी मृत्यु दर 20 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है. तुलना करें तो कोरोना वायरस की मृत्यु दर 1 प्रतिशत से भी कम थी. इसी वजह से इसे काफी खतरनाक माना जा रहा है.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोरोना की तरह तेजी से फैलने वाला नहीं है. यह सिर्फ बहुत नजदीकी संपर्क में आने से फैलता है. क्रूज शिप जैसी जगहों पर लोग लंबे समय तक साथ रहते हैं. इसलिए वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है. डॉक्टरों के मुताबिक अब तक इस वायरस में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है जिससे यह ज्यादा संक्रामक बन जाए. यही वजह है कि वैज्ञानिक फिलहाल इसे सीमित खतरे वाला संक्रमण मान रहे हैं. अधिकांश संक्रमित लोग वही पाए गए हैं जो लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहे थे या एक ही केबिन में मौजूद थे.
इस वायरस की एक और चुनौती यह है कि इसके लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते. शरीर में संक्रमण होने के बाद लक्षण आने में 6 से 8 हफ्ते तक लग सकते हैं. इसी कारण संदिग्ध लोगों की लंबे समय तक निगरानी जरूरी होती है. लेकिन राहत की बात यह है कि यह वायरस खसरे या कोरोना की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता. विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को डरने की जरूरत नहीं है. फिलहाल यह संक्रमण सीमित दायरे में ही दिखाई दे रहा है और हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं.
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि यह वायरस भले ही महामारी न बने, लेकिन दुनिया के लिए एक चेतावनी जरूर है. इससे यह समझ आता है कि किसी भी नए संक्रमण से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था हमेशा तैयार रहनी चाहिए. उन्होंने बताया कि भारत का निगरानी तंत्र अब पहले से काफी मजबूत हो चुका है. किसी भी संदिग्ध बीमारी को जल्दी पहचानने की क्षमता अब बढ़ी है. फिलहाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से सिर्फ सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि यह स्थिति अभी पूरी तरह कंट्रोल में मानी जा रही है.
