how IMF world bank get funding: आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक मुख्य रूप से सदस्य देशों के ‘कोटा अंशदान’ और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड बेचकर फंड जुटाते हैं, जिसका उपयोग गरीब देशों को कर्ज देने में किया जाता है.

how IMF world bank get funding: हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने पाकिस्तान के लिए 1.32 बिलियन डॉलर के नए सहायता पैकेज को मंजूरी दी. इसके बाद फिर यह सवाल उठने लगा कि आखिर दुनिया के देशों को आर्थिक मदद देने वाली संस्थाओं के पास इतना पैसा आता कहां से है. दरअसल IMF और वर्ल्ड बैंक दोनों का काम आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों को सहारा देना है. लेकिन इनके फंड का सिस्टम आम बैंक से काफी अलग होता है. इन संस्थाओं की सबसे बड़ी ताकत दुनिया के सदस्य देश होते हैं, जो इसमें पैसा जमा करते हैं.
IMF की कमाई और फंडिंग का सबसे बड़ा जरिया उसका कोटा सिस्टम है. इसे सदस्य देशों का योगदान कहा जा सकता है. दुनिया के हर सदस्य देश को अपनी आर्थिक ताकत के हिसाब से IMF में पैसा जमा करना पड़ता है. जिस देश की अर्थव्यवस्था बड़ी होती है, उसका योगदान भी ज्यादा होता है. इसी आधार पर उस देश की वोटिंग पावर भी तय होती है. यानी जो देश ज्यादा पैसा देता है, उसकी IMF के फैसलों में उतनी ही ज्यादा ताकत होती है. अमेरिका, चीन, जापान और यूरोपीय देशों का असर इसी वजह से ज्यादा माना जाता है.
IMF सिर्फ पैसा जमा करके नहीं रखता. यह जरूरतमंद देशों को कर्ज भी देता है. जब किसी देश के पास विदेशी मुद्रा की कमी हो जाती है या उसकी अर्थव्यवस्था संकट में फंस जाती है, तब वह IMF से मदद मांगता है. IMF उस देश को लोन देता है और उस पर ब्याज भी लेता है. यही ब्याज उसकी आय का बड़ा हिस्सा बनता है. हालांकि IMF से लोन लेना आसान नहीं होता. इसके साथ कई आर्थिक शर्तें जुड़ी होती हैं. कई बार देशों को टैक्स बढ़ाने, सरकारी खर्च कम करने या आर्थिक सुधार लागू करने पड़ते हैं.
अगर दुनिया में बड़ा आर्थिक संकट आ जाए और IMF के पास जमा पैसा कम पड़ने लगे, तब वह दूसरे रास्तों से फंड जुटाता है. इसके लिए न्यू अरेंजमेंट्स टू बोरो यानी NAB का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें आर्थिक रूप से मजबूत देशों और संस्थाओं से अतिरिक्त पैसा उधार लिया जाता है. इसके अलावा IMF बायलेटरल बोरोइंग एग्रीमेंट यानी BBA के जरिए भी सदस्य देशों से सीधा कर्ज लेता है. इससे संस्था के पास जरूरत के समय ज्यादा फंड उपलब्ध रहता है और वह संकट में फंसे देशों को मदद दे पाती है.
वहीं वर्ल्ड बैंक का काम विकासशील और गरीब देशों में विकास परियोजनाओं के लिए पैसा देना होता है. इसके लिए वह सदस्य देशों के योगदान के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड बेचकर पैसा जुटाता है. उसकी अच्छी क्रेडिट रेटिंग होने की वजह से दुनिया भर के निवेशक उसमें पैसा लगाते हैं. फिर यही रकम सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाओं में कर्ज के रूप में दी जाती है. IMF और वर्ल्ड बैंक दोनों का मकसद दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और जरूरत पड़ने पर देशों को आर्थिक सहारा देना है.
