होर्मुज स्ट्रेट को खेलने के लिए अमेरिका कई देशों की संयुक्त सैन्य व्यवस्था पर काम कर रहा है. भारत के ऊपर भी इसको लेकर दबाव बनाया जा रहा है. हालांकि भारत ने इसे लेकर साफ मना कर दिया है.

होर्मुज को लेकर संयुक्त सैन्य व्यवस्था
मिडिल ईस्ट में जंग के हालातों के चलते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया है. जिसके बाद अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला रखने के लिए कई देशों की संयुक्त सैन्य व्यवस्था पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि अगर ईरान के साथ बात करके कोई समाधान नहीं निकलता है तो इस मामले में कई देशों की सेना को तैनात करने के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी.
भारत ने कर दिया इनकार
आपको बता दें कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश भारत के ऊपर इसको लेकर काफी दबाव बना रहे हैं. हालांकि भारत ने साफ मना कर दिया है कि वह अपनी सेना को वहां नहीं भेजेगा. इस मामले को लेकर भारत का कहना है कि इस तनाव का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए. फ्रांस में मिडिल ईस्ट को लेकर होने वाली बैठक में भी भारत अपना पक्ष रखने वाला है.
कई देश होंगे शामिल
बताया जा रहा है कि ईरान के साथ बातचीत के मुद्दे और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को लेकर फ्रांस ने कतर, UAE, इजिप्ट और साऊदी अरब को न्योता दिया है. यह बैठक 16 जून को आयोजित होने वाली है, जिसमें इन देशों के अलावा भारत और अमेरिका भी शामिल होने वाले हैं. 15 जून से 17 जून तक होने वाले इस समिट में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक साथ आने वाले हैं.
रूस-यूक्रेन मुद्दे पर होगी चर्चा
जानकारी के मुताबिक मिडिल ईस्ट के मुद्दे पर G7 में चर्चा की जाएगी. वहीं रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर भी G7 देशों के बीच चर्चा होने वाली है. बताया जा रहा है कि ज्यादातर मामलों में भारत शामिल होने वाला है. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो के साथ में बैठक करने वाले हैं. साथ ही पीएम मोदी G7 समिट में शामिल होने के साथ पेरिस में एक टोक्नोलॉजी कॉन्फेंस में भी शामिल होने वाले हैं.
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