UN SOFI Report 2026: यूएन की SOFI 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में दुनिया भर में 64.5 करोड़ लोग भुखमरी से पीड़ित रहे और बढ़ती कीमतों के कारण 269 करोड़ लोग पौष्टिक खाना खरीदने में असमर्थ हैं.

UN SOFI Report 2026: दुनिया में आज जितना अनाज पैदा हो रहा है, उतना पहले कभी नहीं हुआ. इसके बावजूद करोड़ों लोगों को पेट भर खाना नसीब नहीं हो पा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की हाल ही में आई SOFI 2026 रिपोर्ट ने इस कड़वे सच को सामने रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक असली समस्या भोजन की कमी नहीं है. बल्कि बढ़ती कीमतें और लोगों की जेब में पैसे न होना है. इसी वजह से पौष्टिक खाना आम इंसान की थाली से दूर होता जा रहा है.
64 करोड़ से ज्यादा लोग झेल रहे भुखमरी
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में दुनिया के करीब 64.5 करोड़ लोग भुखमरी से जूझ रहे थे. हालांकि अच्छी बात यह है कि पिछले सालों की तुलना में इस संख्या में थोड़ी कमी आई है. लेकिन अब भी दुनिया की करीब 7.8 फीसदी आबादी भूखी सो रही है. अफ्रीका में हालात सबसे ज्यादा खराब दर्ज किए गए हैं. वहां की लगभग 20 फीसदी आबादी यानी 30.9 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हैं.
पौष्टिक खाना खरीदना हुआ बेहद मुश्किल
रिपोर्ट की सबसे डरावनी बात यह है कि दुनिया की एक-तिहाई आबादी यानी 269 करोड़ लोग सेहतमंद खाना नहीं खरीद पा रहे हैं. साल 2017 के बाद से पौष्टिक भोजन की कीमतों में करीब 45 फीसदी की भारी तेजी आई है. लोग पेट भरने के लिए कुछ न कुछ तो जुगाड़ कर लेते हैं. लेकिन दाल, दूध, फल और हरी सब्जियों जैसी जरूरी चीजें अब आम लोगों की बजट से बाहर होती जा रही हैं.
क्यों लगातार बढ़ रहे हैं खाने के दाम
खाद्य संकट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं. खराब मौसम, सूखा, बेमौसम बारिश और बाढ़ ने खेती की लागत बहुत बढ़ा दी है. इसके अलावा युद्ध, वैश्विक व्यापार में जारी विवाद और खाद-ईंधन के बढ़ते दामों ने आग में घी का काम किया है. यही वजह है कि मंडियों में सामान तो पहुंच रहा है. लेकिन ऊंचे दामों के कारण वह आम ग्राहक की पहुंच से बाहर बना हुआ है.
भारत के लिए भी खतरे की बड़ी घंटी
इस रिपोर्ट के नतीजे भारत जैसे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी सूखा पड़ता है तो कभी भारी बारिश से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. जब उत्पादन घटता है तो बाजार में फल और सब्जियों के दाम तेजी से भागते हैं. इसका सीधा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की रसोई पर पड़ता है. इसलिए खाद्य सुरक्षा को बचाना अब देश के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.
