new education minister: नीट विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कर्नाटक की धारवाड़ सीट से 5 बार के सांसद प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया गया है.

new education minister: नीट-यूजी परीक्षा विवाद और देश भर में जारी भारी छात्र आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी को देश के नए शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंप दी है. प्रह्लाद जोशी के सामने अब परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और नाराज छात्रों का भरोसा फिर से जीतने की बड़ी चुनौती होगी.
कितने पढ़े-लिखे हैं नए शिक्षा मंत्री
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था. अगर उनकी पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज से बीए (बैचलर ऑफ आर्ट्स) की डिग्री हासिल की है. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में आने से पहले व्यापार और कई सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से काम किया था.
धारवाड़ सीट से लगातार 5 बार सांसद
राजनीति में प्रह्लाद जोशी का सफर काफी लंबा और सफल रहा है. वह साल 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने पहली बार 2004 के लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाई थी और कांग्रेस उम्मीदवार बीएस पाटिल को भारी अंतर से हराया था. इसके बाद वह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. वह 2014 से 2016 तक कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.
आरएसएस से जुड़ाव और चर्चित आंदोलन
प्रह्लाद जोशी का नाता शुरुआत से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से रहा है. वह 1990 के दशक में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे. 1992 से 1994 के दौरान हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने का बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसमें उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी. इसके अलावा उन्होंने ‘कश्मीर बचाओ आंदोलन’ का भी प्रमुखता से नेतृत्व किया था, जिससे पार्टी में उनका कद तेजी से बढ़ा.
मोदी सरकार में निभाई अहम जिम्मेदारियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में प्रह्लाद जोशी ने 30 मई 2019 को पहली बार कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी. उस समय उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय का प्रभार दिया गया था. सरकार में उनकी कुशल कार्यशैली को देखते हुए अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय जैसे बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग की कमान सौंपी गई है.
