rajnath singh statement: NEET परीक्षा विवाद और चौतरफा दबाव के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से मोदी कैबिनेट में मंत्रियों के पद न छोड़ने का 12 साल पुराना सिलसिला टूट गया, जिसके बाद राजनाथ सिंह का 2015 का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

rajnath singh statement: केंद्र की मोदी सरकार में पहली बार किसी कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा हुआ है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ते ही सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल होने लगा है. यह क्लिप 24 जून 2015 की है. इसमें राजनाथ सिंह पत्रकारों से कह रहे थे कि हमारी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते, यह यूपीए नहीं बल्कि एनडीए की सरकार है. अब धर्मेंद्र प्रधान के जाने के बाद लोग इस पुराने बयान को शेयर करके तंज कस रहे हैं.
नीट परीक्षा विवाद से टूटा सालों पुराना रिकॉर्ड
नीट परीक्षा में हुई धांधली को लेकर देशभर में छात्रों का गुस्सा चरम पर था. चौतरफा दबाव के कारण सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा. धर्मेंद्र प्रधान के हटने के साथ ही मोदी कैबिनेट में मंत्रियों के पद न छोड़ने का 12 साल पुराना सिलसिला टूट गया है. इससे पहले साल 2018 में ‘मी टू’ अभियान के दौरान गंभीर आरोप लगने पर एमजे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था. लेकिन किसी मुख्य कैबिनेट मंत्री का इस तरह पद छोड़ना पहली घटना है.
सोनम वांगचुक के अनशन के बाद बढ़ा दबाव
शिक्षा मंत्री ने शनिवार को अपना इस्तीफा सौंपा. नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे. इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए समाज सुधारक सोनम वांगचुक भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे. शुक्रवार को सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया. उनके अनशन खत्म होते ही इस बात की चर्चाएं तेज हो गई थीं कि शिक्षा मंत्री की कुर्सी अब ज्यादा दिन नहीं बचेगी और उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव है.
संसद मार्च और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई
विपक्षी दल और छात्र संगठन काफी समय से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए थे. आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को ‘कॉकरोच पार्टी’ के बैनर तले छात्रों ने ‘चलो संसद’ मार्च निकाला था. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी. इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश के अलग अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गए थे. इसके बाद से ही सरकार बैकफुट पर नजर आने लगी थी.
कार्रवाई के बावजूद नहीं शांत हुआ छात्रों का गुस्सा
शुरुआत में सूत्रों के हवाले से खबर आ रही थी कि मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे. सरकार ने छात्रों के गुस्से को शांत करने के लिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की थी. इसके तहत शुक्रवार रात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी. हालांकि, इस कदम से भी छात्रों और विपक्ष का गुस्सा कम नहीं हुआ. अंततः राजनीतिक दबाव इतना बढ़ गया कि धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना ही पड़ा.
