cjp protest timeline: ED ने मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में छापेमारी कर ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग के जरिए ₹800 करोड़ की ठगी और क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है

cjp protest timeline: ED ने देश में ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसा है. ईडी की मुंबई टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत बड़ी कार्रवाई की है. जांच अधिकारियों ने मुंबई, पुणे और बेंगलुरु के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह नेटवर्क लोगों को ऑनलाइन बेटिंग और निवेश के झूठे वादों में फंसाकर पैसे ठगता था. कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं. इसके साथ ही फ्रॉड से जुड़े दर्जनों बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है.
व्हाट्सएप मैसेज और जलगांव की शिकायत से पर्दाफाश
इस पूरे घोटाले की जांच महाराष्ट्र के जलगांव में दर्ज एक एफआईआर के बाद शुरू हुई. वहां एक व्यक्ति को व्हाट्सएप पर एडसम फिनटेक एक्सचेंज नाम के गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ने का मैसेज आया था. शुरुआत में ठगों ने यूजर को छोटी रकम निकालने की छूट दी. इससे यूजर को प्लेटफॉर्म पर पूरा भरोसा हो गया. लेकिन जैसे ही पीड़ित ने बड़ी रकम का निवेश किया, निकासी रोक दी गई. इसके बाद ठगों ने पीड़ित से संपर्क तोड़ लिया. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि बेंगलुरु में भी एक व्यक्ति से इसी तरह 5.30 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी.
म्यूल अकाउंट्स और फर्जी कंपनियों का बिछाया जाल
ईडी की वित्तीय जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि ठगी का पैसा पुणे की एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खातों में जा रहा था. इस कंपनी ने पूरे देश में फर्जी कंपनियों और ‘म्यूल अकाउंट्स’ का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया था. जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल एक तरह के फ्रॉड तक सीमित नहीं था. इसके तार ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, शेयर ट्रेडिंग स्कैम, क्रिप्टो फ्रॉड और साइबर अपराधों से सीधे जुड़े हुए थे. कई राज्यों में दर्ज दर्जनों साइबर शिकायतों के तार इसी एक सिंडिकेट से जाकर जुड़ते हैं.
800 करोड़ रुपये का क्रिप्टो ट्रेल आया सामने
एजेंसी को जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी. ठगों ने एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के केवाईसी और फर्जी कागजों का इस्तेमाल किया था. इन दस्तावेजों से क्रिप्टो एक्सचेंज पर एक वॉलेट खोला गया. अकेले इस एक वॉलेट के जरिए 800 करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध लेनदेन हुआ. ठग आम लोगों से लूटे गए पैसों को फर्जी कंपनियों के खातों में घुमाते थे. इसके बाद उस रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश में बैठे अपने आकाओं तक आसानी से पहुंचा देते थे.
कागजी कंपनियां और फर्जी डायरेक्टर्स का पर्दाफाश
छापेमारी में ईडी को पता चला कि इस सिंडिकेट की अधिकतर कंपनियां केवल कागजों पर चल रही थीं. इन कंपनियों का जमीन पर कोई वास्तविक कारोबार नहीं था. जांच में कई कंपनियों के पंजीकृत पते पूरी तरह फर्जी पाए गए. यहां तक कि कंपनियों के डायरेक्टर्स भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे. फिलहाल ईडी ने संदिग्ध बैंक खातों को पूरी तरह से सीज कर दिया है ताकि पैसों का आगे ट्रांसफर रोका जा सके. अधिकारियों का कहना है कि जब्त डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है और जल्द ही कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है.
