Crude Oil Price Hike: अमेरिका-ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 95 डॉलर के पार पहुंच गया है और गोल्डमैन सैश ने इसके 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की चेतावनी दी है.

Crude Oil Price Hike: मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के देशों में जारी तनाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के माहौल से दुनियाभर की मुश्किलें बढ़ गई हैं. समंदर के रास्ते कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों से तेल की शिपिंग ठप पड़ गई है. इसका असर यह हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.
गोल्डमैन सैश की डराने वाली चेतावनी
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक ‘गोल्डमैन सैश’ ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक अगर होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही ऐसे ही बंद रही, तो कच्चे तेल का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकता है. बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 95.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. अगर तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आम जनता को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
समुद्री रास्तों पर नाकाबंदी से बिगड़े हालात
फारस की खाड़ी से होने वाली तेल की सप्लाई अब युद्ध से पहले के मुकाबले आधी से भी कम रह गई है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद कंपनियां लाल सागर के रास्ते माल भेजने की कोशिश कर रही थीं. लेकिन वहां यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों ने जहाजों की आवाजाही को बहुत खतरनाक बना दिया है. दोनों मुख्य व्यापारिक समुद्री रास्ते बंद होने की वजह से तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिससे कीमतें तेजी से आसमान छू रही हैं.
क्या घट सकती हैं तेल की कीमतें?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है और शांति बहाल होती है, तो तेल की कीमतें नीचे आ सकती हैं. गोल्डमैन सैश के अनुसार सीजफायर होने की स्थिति में ब्रेंट क्रूड गिरकर 80 डॉलर और अगले साल तक 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकता है. हालांकि फिलहाल हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं. जानकारों का मानना है कि जब तक सीजफायर नहीं होता, तब तक तेल के दामों में भारी उछाल का खतरा बना रहेगा.
भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
अगर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ेगा. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से ही खरीदता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे साग-सब्जियों और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे आम लोगों का बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है.
