Drone attack on indian crew: यह रिपोर्ट 14 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों वाले तेल टैंकर ‘बोकेम मरेंगो’ पर हुए ड्रोन हमले पर आधारित है.

Drone attack on indian crew: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. इस इलाके में दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. हालांकि शांति समझौते को लेकर बातचीत की खबरें आ रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. इस पूरे अंतरराष्ट्रीय विवाद का सबसे बड़ा और खौफनाक असर उन बेकसूर भारतीय नाविकों पर पड़ रहा है, जो इन व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं. 12 और 13 जून की दरमियानी रात को इस इलाके में एक और बड़ा ड्रोन हमला हुआ है, जिसने भारत की चिंता को काफी बढ़ा दिया है.
इस ताजा हमले का शिकार ‘बोकेम मरेंगो’ नाम का एक कमर्शियल जहाज हुआ है. यह एक तेल और केमिकल ले जाने वाला टैंकर है, जिस पर हांगकांग का झंडा लगा हुआ था. इस पूरे जहाज को चलाने और संभालने की जिम्मेदारी भारतीय क्रू मेंबर्स के हाथों में थी. राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इस भयानक ड्रोन हमले के बावजूद जहाज पर सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं. हमले के तुरंत बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम को सक्रिय किया गया. जहाज को कुछ नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन वह डूबा नहीं और अपनी गति से आगे बढ़ता रहा.
तकनीकी तौर पर देखें तो इस हवाई हमले से जहाज के तीन मुख्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. इनमें नंबर 1 और नंबर 2 पोर्ट वाटर बैलास्ट टैंक शामिल हैं, जो समुद्र में जहाज का संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं. इसके अलावा केमिकल रखने वाला नंबर 2 पोर्ट कार्गो टैंक भी इस हमले की चपेट में आ गया. घटना के बाद जहाज प्रबंधन ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सुरक्षा एजेंसियों और यूकेएमटीओ (UKMTO) को मामले की जानकारी दी. सुरक्षित रहने के लिए जहाज को धीरे धीरे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह बंदरगाह की तरफ ले जाया गया है, जहां विशेषज्ञ टीम इसकी मरम्मत करेगी.
यह पूरी घटना इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि यह जहाज अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा निगरानी प्रणाली (NCAGS) के तहत ही वहां से गुजर रहा था. इस रूट पर अमेरिका ने अपनी कड़ी नाकेबंदी कर रखी है ताकि कोई भी बिना अनुमति के व्यापार न कर सके. इससे पहले भी पलाउ के झंडे वाले एक अन्य जहाज ‘एमटी सेटेबेल्लो’ पर अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई थी. उस जहाज पर भी 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें से 21 को जैसे तैसे बचाया जा सका था.
इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत सरकार ने बहुत सख्त रुख अपनाया है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात करके आम जहाजों पर हो रहे इन जानलेवा हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था. नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है. यह पूरी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट 14 जून 2026 को वैश्विक शिपिंग ट्रैकर्स और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है.
