India Russia US: रूस से कच्चे तेल और सुखोई एसयू-57 (Su-57) की संभावित डील पर अमेरिकी टैरिफ और दबाव के चलते भारत की पारंपरिक संतुलन वाली विदेश नीति के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

India Russia US: भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिसने रूस और अमेरिका दोनों के साथ बेहतरीन संबंध बनाए रखे हैं. भारत पारंपरिक रूप से अपनी सैन्य जरूरतों और सस्ते कच्चे तेल के लिए रूस पर निर्भर रहा है. वहीं दूसरी तरफ उसने अमेरिका के साथ रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा समझौतों को भी मजबूत किया है. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद भारत की इस संतुलित विदेश नीति के सामने अब तक का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
अमेरिका और रूस के बीच संतुलन बनाने की चुनौती
भारत ने हमेशा अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर फैसले लिए हैं. एक तरफ अमेरिका के साथ रक्षा और नई तकनीकों का दायरा बढ़ाया गया तो दूसरी तरफ रूस से रियायती तेल की खरीद जारी रही. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ ठोक दिया. इसके बावजूद भारत ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया जिससे दोनों देशों के रिश्तों में अब तक की सबसे बड़ी तल्खी देखी जा रही है.
एस-400 डील और सुखोई एसयू-57 फाइटर जेट का विकल्प
अतीत में जब भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा था तब अमेरिका ने प्रतिबंधों की धमकी दी थी. बाद में बाइडन प्रशासन ने भारत की अहमियत समझते हुए छूट दे दी थी. अब खबर है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत रूस से 40 सुखोई एसयू-57 (Su-57) स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की तैयारी कर रहा है. यह कदम चीन और पाकिस्तान की सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की वायुसेना क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है.
होर्मुज तनाव और भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से बने हालात ने भारत का बजट और अर्थव्यवस्था बिगाड़ दी है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों से भारतीय नाविकों की जान गई है और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत में रसोई गैस और तेल का संकट देखा गया. हालांकि सरकार ने अलग-अलग स्रोतों से आयात बढ़ाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, फिर भी अमेरिकी फैसलों ने भारत की आर्थिक सुरक्षा को बड़ा झटका दिया है.
आगे की राह और कूटनीतिक चुनौतियां
भारत के लिए आने वाला समय कूटनीतिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. लगातार बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के कारण अमेरिका और रूस दोनों के साथ एक जैसा संबंध बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी और रूस में भी पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता ने भारत के लिए नई परेशानियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बहुत सावधानी से कदम आगे बढ़ाने होंगे.
