shivsena foundation day: ये खबर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को उनके स्थापना दिवस से पहले मिलने वाले बड़े झटके और उनके 9 में से 6 लोकसभा सांसदों द्वारा एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना पर आधारित है.

shivsena foundation day: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं. उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) को 19 जून को होने वाले पार्टी के स्थापना दिवस से पहले एक बहुत बड़ा झटका लग सकता है. राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पार्टी से बगावत करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं. इनमें से दो बागी सांसद पहले ही देश की राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं बाकी बचे चार सांसद भी आज रात तक दिल्ली पहुंच रहे हैं. बताया जा रहा है कि ये सभी छह सांसद मिलकर पहले संसद में अपना एक अलग गुट बनाएंगे. इसके बाद ये सभी लोग मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना में अपनी इस नई टीम का विलय कर देंगे.
पार्टी के अंदर होने वाली इस संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे के खेमे में भी हड़कंप मच गया है. उद्धव के बेहद करीबी और वरिष्ठ नेता संजय राउत और सांसद अनिल देसाई तुरंत डैमेज कंट्रोल के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं. वे इन नाराज सांसदों को मनाने की आखिरी कोशिश में जुटे हैं. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे को यह सबसे बड़ा राजनीतिक जख्म देने की योजना बना रहे हैं. अगर यह टूट हकीकत में बदल जाती है, तो केंद्र सरकार में एकनाथ शिंदे की ताकत और ज्यादा बढ़ जाएगी. फिलहाल शिंदे गुट के पास लोकसभा में 7 सांसद हैं, जिससे वे बीजेपी के तीसरे सबसे बड़े सहयोगी दल बने हुए हैं.
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के बीच महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम के एक गुप्त मिशन की जमकर चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि इस सीक्रेट ऑपरेशन के तहत उद्धव गुट के कई सांसद पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल होने वाले हैं. हालांकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सार्वजनिक रूप से इस तरह के किसी भी दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया था. शिंदे का कहना था कि अब सारे चुनाव खत्म हो चुके हैं. इसलिए अब उन्हें सरकार चलाने के लिए किसी भी तरह के नए ‘नंबर गेम’ या जोड़ तोड़ की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है.
लेकिन इस पूरे मामले की असली हकीकत तब सामने आई जब उद्धव ठाकरे ने अपने सभी 9 सांसदों को एक जरूरी बैठक के लिए ‘मातोश्री’ बुलाया था. इस अहम बैठक में आमने सामने केवल 4 सांसद ही मौजूद रहे, जिनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय दीना पाटील शामिल थे. सांसद ओमराजे निंबालकर इस बैठक से पूरी तरह गायब रहे. वहीं दो अन्य सांसद संजय देशमुख और नागेश पाटील केवल ऑनलाइन माध्यम से ही इस मीटिंग में शामिल हुए. सांसदों की इस कम संख्या को देखकर उद्धव ठाकरे भी भाप गए कि कुछ गड़बड़ है. उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिसे भी पार्टी छोड़कर जाना है, वह खुशी खुशी जा सकता है. बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना को धोखा देने वाले लोग भविष्य में सिर्फ पछताएंगे.
अगर यह बगावत सच साबित होती है, तो पिछले चार साल में उद्धव ठाकरे के लिए यह दूसरा सबसे बड़ा और जानलेवा राजनीतिक झटका होगा. यह शिवसेना के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी टूट मानी जाएगी. इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने करीब 40 विधायकों के साथ मिलकर बगावत की थी, जिसके कारण उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी. बाद में शिंदे के साथ आने वाले विधायकों की संख्या 50 तक पहुंच गई थी. उसी भारी बहुमत के कारण चुनाव आयोग ने भी ‘शिवसेना’ नाम और उनका पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘धनुष बाण’ एकनाथ शिंदे के गुट को सौंप दिया था. अब देखना होगा कि उद्धव इस बार अपने सांसदों को बचा पाते हैं या नहीं.
